Thursday, August 5, 2021

ऐसे ही नहीं बनते पहलवान! एक माह से मां ने नहीं सुनी आवाज, बेटे रवि को याद कर निकले आंसू August 05, 2021 at 01:25AM

तोक्यो देश के सपूत रवि दहिया भले ही ओलिंपिक गोल्ड मेडल से चूक गए, लेकिन कुश्ती में सिल्वर लाने वाले वह भारत के दूसरे पहलवान बन गए। कड़ी मेहनत, वर्षों का संघर्ष और त्याग ने खेलों के महाकुंभ में उनकी 'चांदी' की। हिंदुस्तान में कुश्ती के नए पोस्टर बॉय बन चुके रवि के लिए यह सफर कतई आसान नहीं था। छत्रसाल स्टेडियम में सीखा दांवपेच महज 23 साल के रवि स्वभाव से शांत और शर्मिले हैं। उनके पिता राकेश कुमार ने उन्हें 12 साल की उम्र में छत्रसाल स्टेडियम भेजा था, तब से वह महाबली सतपाल और कोच वीरेंद्र के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग करते रहे हैं। यह दिल्ली का वही छत्रसाल स्टेडियम है, जहां से पहले ही भारत को दो ओलिंपिक पदक विजेता सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त मिल चुके हैं। बात करते-करते रो पड़ी मां जीत-हार पर हर कोई एक सा नहीं रहता। रवि की यही तो खासियत है। न वह सेमीफाइनल में जीत के बाद खुशी से उछले और न ही हार के बाद चेहरे पर दर्द नजर आया, लेकिन उनकी मां जरूर भावुक हो गई। एक निजी टीवी चैनल पर बातचीत के दौरान बताया कि एक माह से बात नहीं हुई। जब वह यह कह रहीं थीं तो चेहरे पर दर्द और मां की ममता समझी और देखी जा सकती थी। आखिरकार भावनाएं उमड़ ही गई और टप-टप आंखों से आंसू बहने लगे। पिता के संघर्ष ने बनाया पहलवान रवि दहिया के पिता ने कभी भी अपनी परेशानियों को बेटे की ट्रेनिंग का रोड़ा नहीं बनने दिया। वह रोज खुद छत्रसाल स्टेडियम तक दूध और मक्खन लेकर पहुंचते जो उनके घर से 60 किलोमीटर दूर था। वह सुबह साढ़े तीन बजे उठते, पांच किलोमीटर चलकर नजदीक के रेलवे स्टेशन पहुंचते। रेल से आजादपुर उतरते और फिर दो किलोमीटर चलकर छत्रसाल स्टेडियम पहुंचते। फिर घर पहुंचकर खेतों में काम करते और यह सिलसिला 12 साल तक चला। कोविड-19 के कारण लॉकडाउन से इसमें बाधा आई। बेटे के पदक से वह अपना दर्द निश्चित रूप से भूल जाएंगे। अपने गांव के तीसरे ओलिंपियन हैं रवि महज 23 साल के रवि हरियाणा के सोनीपत जिले के नाहरी गांव से आते हैं। यह वही गांव है, जिसने देश को महावीर सिंह (मास्को ओलिंपिक, 1980 और लॉस एंजिल्स ओलिंपिक 1984) और अमित दहिया (लंदन ओलिंपिक-2012) जैसे ओलिंपियन दिए। 15 हजार की आबादी वाले इस गांव में न तो पीने के पानी की सही व्यवस्था है और न ही सीवेज लाइन। बिजली तो आते-जाती रहती है। सुविधाओं के नाम पर सिर्फ जानवरों का एक अस्पताल है।

ओह! आखिरी 12 सेकेंड में पलटी बाजी.... बढ़त बनाने के बाद हारे पहलवान दीपक पूनिया August 05, 2021 at 01:36AM

तोक्योभारतीय युवा पहलवान दीपक पूनिया को तोक्यो ओलिंपिक में कुश्ती के 86 किलोग्राम फ्रीस्टाइल के ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने सैन मारिनो के पहलवान माइलेस नाजिम अमीन के खिलाफ शुरुआत में बढ़त भी ले ली थी, लेकिन आखिरी के 10 सेकंड में अमीन ने बाजी पलटते हुए भारतीय पदक की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। रवि को मिला सिल्वरइससे ठीक पहले 57 किलोग्राम भारवर्ग में पहलवान रवि कुमार दहिया इतिहास रचने से चूक गए। उन्होंने खिताबी मुकाबले में वर्ल्ड चैंपियन रूस के जावुर युगुऐव से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस तरह वह सुशील कुमार के बाद कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारत के दूसरे पहलवान बन गए हैं। 130 करोड़ भारतीयों की गोल्ड मेडल उम्मीद के साथ उरते रवि ने वर्ल्ड चैंपियन के आगे अपना शतप्रतिशत दिया। वह अंत तक लड़े, लेकिन 7-4 से हार गए। कुश्ती में पदक का इतिहासकेडी जाधव भारत को कुश्ती में पदक दिलाने वाले पहले पहलवान थे जिन्होंने 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। उसके बाद सुशील ने बीजिंग में कांस्य और लंदन में रजत पदक हासिल किया। सुशील ओलंपिक में दो व्यक्तिगत स्पर्धा के पदक जीतने वाले अकेले भारतीय थे लेकिन बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने कांस्य जीतकर बराबरी की। लंदन ओलंपिक में योगेश्वर दत्त ने भी कांस्य पदक जीता था। वहीं साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक 2016 में कांस्य पदक हासिल किया था। 2020 में रवि दहिया ने सिल्वर मेडल जीता।

खूब लड़ा 'सुलतान'... देश के ल‍िए रव‍ि दहिया लाए स‍िल्‍वर, 6 की उम्र से शुरू कर दिया था दंगल August 05, 2021 at 01:05AM

पहलवान रवि दहिया गुरुवार को गोल्‍ड लाने से चूक गए। तोक्यो ओलिंपिक फाइनल में पहुंचकर उन्‍होंने भारत के लिए पहले ही पदक पक्का कर दिया था। पूरा देश उनसे गोल्‍ड की उम्‍मीद कर रहा था। दहिया के गांव में जश्न का माहौल है। दहिया बुधवार को ओलिंपिक खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बने। उन्होंने 57 किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में कजाखिस्तान के नूरिस्लाम सनायेव को पटखनी दी।

दहिया से पहले सुशील कुमार फाइनल में पहुंचने वाले एकमात्र पहलवान थे। उन्होंने लंदन ओलिंपिक 2012 में रजत पदक हासिल किया था। पूरे देश के साथ नाहरी गांव में रवि के परिजन और रिश्तेदार उनसे गोल्‍ड लाने की उम्‍मीद लगाए हुए थे। किसान के पुत्र रवि दहिया इस गांव के तीसरे ओलिंपियन हैं। उनसे पहले महावीर सिंह (मास्को 1980 और लास एंजिल्स 1984) और अमित दहिया (लंदन 2012) भी इसी गांव के थे।


खूब लड़ा 'सुलतान'... देश के ल‍िए रव‍ि दहिया लाए स‍िल्‍वर, 6 साल की उम्र से शुरू कर दिया था दंगल

पहलवान रवि दहिया गुरुवार को गोल्‍ड लाने से चूक गए। तोक्यो ओलिंपिक फाइनल में पहुंचकर उन्‍होंने भारत के लिए पहले ही पदक पक्का कर दिया था। पूरा देश उनसे गोल्‍ड की उम्‍मीद कर रहा था। दहिया के गांव में जश्न का माहौल है। दहिया बुधवार को ओलिंपिक खेलों के फाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय पहलवान बने। उन्होंने 57 किग्रा भार वर्ग के सेमीफाइनल में कजाखिस्तान के नूरिस्लाम सनायेव को पटखनी दी।



छह साल की उम्र से गांव के अखाड़े में कुश्ती शुरू की
छह साल की उम्र से गांव के अखाड़े में कुश्ती शुरू की

सोनीपत में पहलवान रवि कुमार दहिया के परिवार के सदस्यों में खूब उत्‍साह है। फाइनल मुकाबले से पहले रवि के पिता राकेश दहिया ने कहा, 'देश को विश्वास है कि वह स्वर्ण जीतेगा। यहां उत्सव का माहौल है। वह देश का नाम रोशन करेगा।' यह अलग बात है कि रवि को सिल्‍वर से ही संतोष करना पड़ा। फाइनल में वह रूस के पहलवान Zavur Uguev से हार गए। राकेश ने बताया कि छह साल की उम्र से रवि ने गांव के अखाड़े में कुश्ती शुरू कर दी थी। बाद में वह दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में चले गए थे। वह प्रत्येक दिन गांव से अपने बेटे के लिए दूध और मक्खन लेकर जाते थे ताकि उनके बेटे को पोषक आहार मिल सके।



​गांव के तीसरे ओलिंपियन हैं रवि
​गांव के तीसरे ओलिंपियन हैं रवि

दहिया की दादी सावित्री ने कहा कि वह अपने पोते की उपलब्धि से बेहद खुश हैं। एक अन्य रिश्तेदार रिंकी ने कहा, 'रवि ने मुझसे कहा था कि मौसी मैं पूरे देश को गौरवान्वित करूंगा और उसने ऐसा कर दिखाया।' इस गांव की जनसंख्या 15000 है। किसान के पुत्र रवि दहिया इस गांव के तीसरे ओलिंपियन हैं। उनसे पहले महावीर सिंह (मॉस्को 1980 और लॉस एंजिल्स 1984) और अमित दहिया (लंदन 2012) भी इसी गांव के थे।



तोक्‍यो ओलिंपिक में भारत का दूसरा सिल्‍वर
तोक्‍यो ओलिंपिक में भारत का दूसरा सिल्‍वर

भारतीय पहलवान रवि दहिया गुरुवार को तोक्‍यो में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक से चूक गए। उन्हें तोक्यो ओलिंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता के पुरुषों के 57 किग्रा भार वर्ग में रूसी ओलंपिक समिति के जावुर युवुगेव से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा। युवुगेव ने अपने बेहतरीन डिफेंस का प्रदर्शन किया। उन्‍होंने अंकों के आधार पर यह मुकाबला 7-4 से जीता। कुश्ती में भारत का यह दूसरा रजत पदक है। इससे पहले सुशील कुमार लंदन ओलंपिक 2012 के फाइनल में पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था। तोक्यो खेलों में भारत ने अपना दूसरा रजत पदक हासिल किया। इससे पहले भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने महिलाओं के 49 किग्रा भार वर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया था। भारत को कुश्ती में पदक दिलाने वाले पहले पहलवान खशाबा जाधव थे। उन्होंने हेलसिंकी ओलंपिक 1952 में कांस्य पदक जीता था। उसके बाद सुशील ने बीजिंग में कांस्य और लंदन में रजत पदक हासिल किया। सुशील ओलंपिक में दो व्यक्तिगत स्पर्धा के पदक जीतने वाले अकेले भारतीय थे और अब बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू ने यहां कांस्य जीतकर इसकी बराबरी की। लंदन ओलिंपिक में योगेश्वर दत्त ने भी कांस्य पदक जीता था। वहीं, साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक 2016 में कांसे का तमगा हासिल किया था।



​पीएम ने दी पह‍लवान को बधाई
​पीएम ने दी पह‍लवान को बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तोक्यो ओलिंपिक की कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीतने वाले भारतीय पहलवान रवि दहिया को बधाई दी। पीएम ने कहा कि उनका जुझारूपन और उनकी दृढ़ता उत्कृष्ट हैं। प्रधानमंत्री ने एक ट्वीट में कहा, 'रवि कुमार दहिया एक शानदार पहलवान हैं। उनका जुझारूपन और उनकी दृढ़ता उत्कृष्ट हैं। तोक्यो ओलिंपिक में रजत पदक जीतने पर उन्हें बधाइयां। उनकी इस उपलब्धि पर भारत को गर्व है।' कुश्ती में भारत का यह दूसरा रजत पदक है। इससे पहले सुशील कुमार लंदन ओलिंपिक 2012 के फाइनल में पहुंचे थे। लेकिन, उन्हें रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा था। निशानेबाज अभिनव बिंद्रा भारत की तरफ से ओलिंपिक में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी थे। उन्होंने बीजिंग ओलिंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में सोने का तमगा हासिल किया था।



संदीप और राहुल के घर वाले बोले-खूब चले लाडले:ओलिंपिक में 20 किलोमीटर की पैदल चाल में बहाया दोनों ने पसीना, घर पर TV से चिपके रहे पड़ोसी August 05, 2021 at 01:14AM