Tuesday, March 1, 2022
India vs Sri Lanka: विराट कोहली के 100वें टेस्ट में दर्शकों को इजाजत नहीं, क्या बोले सुनील गावस्कर March 01, 2022 at 02:42AM
नई दिल्ली: भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज (India vs Sri Lanka) का पहला मुकाबला चार मार्च से मोहाली ( Test Series) में खेला जाएगा। यह पूर्व कप्तान के करियर ( Match) का 100वां मुकाबला होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI ने कोरोना प्रोटोकॉल (Corona Rules) के चलते इस मैदान में दर्शकों को आने की इजाजत नहीं दी है। पूर्व भारतीय कप्तान और महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) ने बोर्ड के इस फैसले पर अपनी राय रखी है। कोहली भारत के 100 टेस्ट मैच खेलने वाले 12वें खिलाड़ी होंगे। वह सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले की लिस्ट में शामिल हो जाएंगे। पंजाब क्रिकेट असोसिएशन के कोषाध्यक्ष आरपी सिंगला ने शनिवार को इस बात की पुष्टि कर दी थी बीसीसीआई के निर्देशों के मुताबिक मोहाली टेस्ट बंद दरवाजों में खेला जाएगा। सिंगला ने कहा था, 'केवल उन लोगों के, जो टेस्ट मैच के दौरान मैदान पर ड्यूटी दे रहे होंगे, हम बीसीसीआई के दिशा-निर्देशों के मुताबिक मैदान पर आम दर्शकों को आने की इजाजत नहीं देंगे।' उन्होंने कहा, 'मोहाली और उसके आसपास के इलाकों में कोविड के ताजा मामले सामने आ रहे हैं, तो सुरक्षा के सभी मापदंडों का पालन करना जरूरी है। बेशक, फैंस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की कमी महसूस कर रहे होंगे। मोहली में करीब तीन साल बाद अंतरराष्ट्रीय मैच हो रहा है।' वहीं गावसकर की बात करें तो उन्होंने कोहली के इस 100वें टेस्ट मैच में दर्शकों की गैर-मौजूदगी पर निराशा जताई। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला बड़े हित को ध्यान में रखकर लिया गया है। गावस्कर ने कहा, 'आप कोई भी खेल खेलें आप चाहते हैं कि दर्शक वहां मौजूद रहें। भारत ने हाल ही में दर्शकों के बिना मुकाबले खेले हैं। कोई भी परफॉर्मर हो, चाहे वह ऐक्टर हो या क्रिकेटर, वह दर्शकों के सामने खेलना चाहता है। 100वां टेस्ट बहुत खास होता है। यह निराशा की बात है कि इस मैच के लिए मैदान पर दर्शक नहीं होंगे लेकिन मुझे लगता है कि यह फैसला बड़े हित को ध्यान में रखकर किया गया है। मोहाली के आसपास केस बढ़े हैं, यहीं मैच खेला जाना है।' खबरों के मुताबिक सीरीज का दूसरा मैच जो बेंगलुरु में खेला जाना है, डे-नाइट होगा और उसमें 50 फीसदी दर्शकों को आने की इजाजत होगी।
'अलग मिट्टी के बने हैं विराट कोहली', साथी क्रिकेटर ने किया 16 साल पुरानी घटना को याद March 01, 2022 at 12:01AM
नई दिल्ली: कर्नाटक के खिलाफ 2006 में दिल्ली के रणजी ट्रॉफी मैच के तीसरे दिन जब पुनीत बिष्ट (Punit Bisht) ड्रेसिंग रूम में पहुंचे तो कमरे में सन्नाटा पसरा था और एक कोने में 17 वर्ष का () बैठा था जिसकी आंखें रोने से लाल थीं। बिष्ट यह देखकर सकते में आ गए लेकिन उन्हें अहसास हो गया कि इस लड़के के भीतर कोई तूफान उमड़ रहा है। कोहली के पिता प्रेम (Virat Kohli Father Prem Kohli) का कुछ घंटे पहले ही ब्रेन स्ट्रोक के कारण निधन हुआ था। कोहली और बिष्ट अविजित बल्लेबाज थे लेकिन कोहली पर मानों दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। एक समय दिल्ली के विकेटकीपर रहे बिष्ट अब मेघालय के लिए खेलते हैं। उन्होंने उस घटना को याद करते हुए कहा, ‘आज तक मैं सोचता हूं कि उसके भीतर ऐसे समय में मैदान पर उतरने की हिम्मत कहां से आई। हम सब स्तब्ध थे और वह बल्लेबाजी के लिए तैयार हो रहा था।’ उन्होंने कोहली के सौवें टेस्ट (Virat Kohli 100th Test) से पहले उस घटना को याद करते हुए कहा, ‘उसके पिता का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ था और वह इसलिए आ गया कि वह नहीं चाहता था कि टीम को एक बल्लेबाज की कमी खले क्योंकि मैच में दिल्ली की हालत खराब थी।’ सोलह साल पहले की वह घटना आज भी बिष्ट को याद है और यह भी कि कप्तान मिथुन मन्हास (Mithun Manhas) और तत्कालीन कोच चेतन चौहान (Chetan Sharma) ने विराट को घर लौटने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, ‘उस समय चेतन सर हमारे कोच थे। चेतन सर और मिथुन भाई दोनों ने विराट को घर लौटने को कहा था क्योंकि उन्हें लगा कि इतनी कम उम्र में उसके लिए इस सदमे को झेलना आसान नहीं होगा।’ उन्होंने कहा, ‘टीम में सभी की यही राय थी कि उसे अपने घर परिवार के पास लौट जाना चाहिए। लेकिन विराट कोहली अलग मिट्टी के बने हैं।’ बिष्ट ने करीब एक दशक तक दिल्ली के लिए खेलने के बाद 96 प्रथम श्रेणी मैचों में 4378 रन बनाए हैं। इसके बावजूद युवा विराट कोहली के साथ 152 रन की वह साझेदारी उन्हें सबसे यादगार लगती है। बिष्ट ने उस मैच में 156 और कोहली ने 90 रन बनाए थे। उन्होंने कहा, ‘विराट ने अपने दुख को भुलाकर जबर्दस्त दृढ़ता दिखाई थी। उसने कुछ शानदार शॉट्स खेले और मैदान पर हमारी बहुत कम बातचीत हुई। वह आकर इतना ही कहता था कि लंबा खेलना है , आउट नहीं होना है। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं। मेरा दिल कहता था कि उसके सिर पर हाथ रखकर उसे तसल्ली दूं लेकिन दिमाग कहता था कि नहीं, हमें टीम को जिताने पर फोकस करना है।’बिष्ट ने कहा, ‘इतने साल बाद भी विराट उसी 17 साल के लड़के जैसा है। उसमें कोई बदलाव नहीं आया।’ बंगाल के विकेटकीपर श्रीवत्स गोस्वामी ने भी भारत के लिए अंडर 19 क्रिकेट खेलने के दिनों को याद करते हुए कहा, ‘हम बंगाल से थे और विराट दिल्ली से। उसकी ऊर्जा और आक्रामकता गजब की थी। उसके साथ रहते हुए कोई भी पल उबाऊ नहीं होता था।’
Subscribe to:
Posts (Atom)