Sunday, August 8, 2021

भास्कर एक्सक्लूसिव:नीरज चोपड़ा बोले- फाइनल से पहले कोच ने कहा था, पहला थ्रो बेस्ट करना; मेरा अगला टारगेट वर्ल्ड कप और कॉमनवेल्थ August 08, 2021 at 04:39PM

ड्रॉ मुकाबले में भारत का पलड़ा भारी रहा:अंग्रेज बल्लेबाजों की आंखों में दिखा भारतीय तेज गेंदबाजों का खौफ, दूसरे टेस्ट में अश्विन को मौका देना बेहतर होगा August 08, 2021 at 03:52PM

टोक्यो म्हं हरियाणा ‘प्रधान’:ओलिंपिक में देश का 121 साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, इसमें सबसे बड़ा योगदान हरियाणा का रहा August 08, 2021 at 12:30PM

उपलब्धि: 4 ओलिंपिक में देश के 20 मेडल; 11 हरियाणा के, वजह- स्कूल से ही तैयारी,प्रदर्शन: इस बार देश के सर्वाधिक 7 मेडल, हरियाणा को पहले गोल्ड समेत तीन पदक,गौरव: 2% आबादी के हरियाणा से देश के दल में 24% खिलाड़ी, 50% मेडल हमारे

48वें पायदान पर रहा भारत, पाकिस्तान समेत दूसरे पड़ोसी देश तोक्यो ओलिंपिक में कहां खड़े August 08, 2021 at 07:54AM

तोक्यो बेहद विपरिति हालातों में आखिरकार ओलिंपिक का समापन हुआ। खाली स्टेडियम में बिना फैंस के बीच ऐथलीट पसीना बहाते रहे। अपने देश के लिए मेडल लाते रहे। भारत के लिए खेलों का यह महाकुंभ बेहद खास रहा। हमारे खिलाड़ियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दिखाया। सात मेडल के साथ यह पदकों के लिहाज से हिंदुस्तान का बेस्ट परफॉर्मेंस भी था। भारत 48वें पायदान पर रहा। पदक तालिका में 113 मेडल के साथ अमेरिका टॉप तो दूसरे पोजिशन पर खड़े चीन ने 88 पदक हासिल किए। मगर क्या आपको पता है हमारे पड़ोसी मुल्कों ने ओलिंपिक में कैसा खेल दिखाया? पाकिस्तान का खाता भी नहीं खुलासाल 1947 में जब भारत आजाद हुआ तब पाकिस्तान अलग मुल्क बना। एक-साथ दोनों ही देशों को विकास की सीढ़ियां चढ़नी थी। मगर तोक्यो में पाकिस्तान का खाता तक नहीं खुल पाया। हालांकि स्वर्णवीर नीरज चोपड़ा के साथ फाइनल में पाकिस्तानी एथलीट अरशद नदीम भी पहुंचे थे। अपनी देश की ओर से फाइनल में पहुंचने वाले वह पहले पाकिस्तानी थे। तीन दशक से मेडल नहीं जीत पाया पाकिस्तानतोक्यो ओलिंपिक में पाकिस्तान का 22 सदस्यीय दल गया था, जिसमें 10 एथलीट और 12 अधिकारी थे। पाकिस्तान लगभग तीन दशकों से पदक जीतने का इंतजार कर रहा है। आखिरी बार 1992 में बार्सिलोना ओलिंपिक में हॉकी में ब्रॉन्ड मेडल आया था। तब पाकिस्तान की टीम तीसरे नंबर पर रही थी। पाकिस्तान के लिए आखिरी व्यक्तिगत मेडल मुक्केबाज हुसैन शाह पदक लाए थे, 1988 के बाद से यह सूखा भी खत्म नहीं हुआ है। बांग्लादेश और श्रीलंका भी तरसेबांग्लादेश ने शूटिंग, स्विमिंग, आर्चरी और एथलेटिक्स के कुल छह खिलाड़ियों का दल भेजा था। सब बेरंग लौटे। दूसरी ओर श्रीलंका के स्क्वॉड में नौ खिलाड़़ी थे। यहां भी किसी को कोई सफलता नहीं मिली। ओलिंपिक इतिहास में श्रीलंका के खाते में दो मेडल आए हैं। दोनों ही सिल्वर पदक हैं। दरअसल, 2000 सिडनी ओलिंपिक में महिलाओँ की 400 मीटर हर्डल रेस में सुशांतिक जयसिंघे तीसरे पायदान पर रही थी, लेकिन मरिन जोन्स के डोप टेस्ट में फेल होने के बाद वह ब्रॉन्ज मेडल, सिल्वर में तब्दील हो गया।