Thursday, March 11, 2021
IND W vs SA W: मिताली राज ने रचा इतिहास, 10 हजार रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर बनीं March 11, 2021 at 08:08PM
लखनऊ भारत की दिग्गज महिला क्रिकेट मिताली राज ने शुक्रवार को इतिहास रच दिया। 38 वर्षीय मिताली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाली भारत की पहली और दुनिया की दूसरी महिला खिलाड़ी बन गई हैं। मिताली ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज के तीसरे मैच में यह मुकाम हासिल किया। मिताली लखनऊ में खेले जा रहे मुकाबले में जैसे ही 35 के निजी स्कोर पर पहुंची उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की ली। इंग्लैंड की चार्लेट एडवर्ड्स अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाली पहली महिला खिलाड़ी थीं। मिलाती को उनसे आगे निकलने के लिए अब 299 रन की जरूरत है। ऐसा करके वह महिला क्रिकेट में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाली खिलाड़ी बन जाएंगी। मिताली हालांकि इसका जश्न नहीं मना पाईं और अपने स्कोर में सिर्फ एक रन जोड़कर आउट हो गई। मिताली वनडे में सबसे ज्यादा रन 6974 रन बनाए हैं। वह वनडे इंटरनैशनल में 7000 रन बनाने वाली पहली महिला क्रिकेटर बनने से सिर्फ 36 रन ही दूर हैं। वहीं 89 टी20 इंटरनैशनल मैचों में उनके 2364 रन हैं। वहीं 10 टेस्ट मैचों में उनके नाम 663 रन हैं। इस मैच में उन्होंने तीसरे विकेट के लिए पूनम राउत के साथ 77 रन की साझेदारी की। दोनों ने भारत को 64/2 के मुश्किल स्कोर से निकाला। साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया था।
ऑस्ट्रेलिया दौरे से लौटकर पृथ्वी साव ने की थी सचिन तेंडुलकर से बात March 11, 2021 at 08:00PM
नई दिल्ली पृथ्वी साव () ने खुलासा किया है कि ऑस्ट्रेलिया दौरे (India Tour of Australia) से वापस आने के बाद उन्होंने सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar) से बात की थी। युवा सलामी बल्लेबाज ने यह भी बताया कि आखिर ऑस्ट्रेलिया में अंदर आती गेंद पर वह क्यों परेशान हो रहे थे। ऑस्ट्रेलिया में पहले टेस्ट में साव का प्रदर्शन बहुत खराब रहा था जिसके बाद उन्हें टीम से ड्रॉप कर दिया गया था। पृथ्वी साव (Prithvi Shaw) को ऑस्ट्रेलिया में सलामी बल्लेबाज की पहली पसंद के तौर पर चुना गया था। हालांकि ऐडिलेड में खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट मैच में पहली पारी में वह खाता भी नहीं खोल पाए और दूसरी पारी में चार बनाकर आउट हो गए थे। कुल मिलाकर पहले टेस्ट में उन्होंने सिर्फ छह गेंद खेली थीं। उनके स्थान पर अगले टेस्ट मैच में शुभमन गिल (Shubman Gill) को शामिल किया गया था। साव की तकनीक (Shaw Technique) को लेकर सवाल उठने लगे थे। 21 वर्षीय इस बल्लेबाज ने अपनी चुनौतियों के बारे में बताया कि कैसे ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद उन्होंने इस पर सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar) से बात की। अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में साव (Shaw) ने कहा, 'मैं वापस आने के बाद सचिन सर से मिला। उन्होंने कहा कि ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है बस जितना हो सके शरीर के करीब से खेला। मैं गेंद पर देरी से आ रहा था। तो ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान, मैंने इस पर काम किया। इसकी वजह यह भी हो सकती है कि ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले मैं दुबई में आईपीएल खेल रहा था।' साव ऐडिलेड टेस्ट की दोनों पारियों में एक ही तरीके से आउट हुए। उन्हें मिशेल स्टार्क (Mitchell Starc) और पैट कमिंस (Pat Cummins) ने इनस्विंगिंग गेंद फेंकी। दोनों बार गेंद उनके बल्ले और पैड के बीच के गैप से निकलकर विकेटों से टकराई। अपने आउट होने के तरीके पर साव ने भी माना कि उनके खेल में कुछ कमी थी। साव ने कहा, 'मेरी मनोदशा सही नहीं चल रही थी। मेरा बैट गली एरिया से नीचे आ रहा था लेकिन मैंने सारी जिंदगी इसी तरह से रन बनाए थे। समस्या यह थी कि मैं जिस तरह आउट हो रहा था उसके बाद मुझे इसे फौरन सुधारना बहुत जरूरी था। शुरुआती मूवमेंट में कुछ समस्या थी। मैं फिक्स्ड पोजीशन में था। मुझे अपना बैट शरीर के करीब रखना था, जो मैं नहीं कर रहा था।' पृथ्वी साव ने भारतीय टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) और बल्लेबाजी कोच विक्रम राठौड़ (Vikram Rathour) को भी श्रेय दिया जिन्होंने उनकी कमी को पहचान कर उसे दूर करने में मदद की। रवि सर और विक्रम सर ने मुझे अहसास करवाया कि मैं क्या गलती कर रहा हूं। मुझे इसका हल निकालना था। नेट्स पर जाकर इसे दूर करना था। यह एक छोटी सी गलती थी जो मैं कर रहा था। ऐडिलेड पिंक बॉल टेस्ट में जैसे मैं आउट हुआ उन दो गेंदों पर वाकई मैं बहुत बुरा खेला।
दोनों हथेलियां नहीं, फिर भी जड़ते हैं चौके-छक्के, कमाल हैं सचिन नागर March 11, 2021 at 05:53PM
अम्बरीश त्रिपाठी, नोएडा मेहनत के बल पर क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। इसको सही साबित कर रहे हैं दिव्यांग क्रिकेटर। नोएडा में गुरुवार से शुरू हुए दिव्यांग टी-10 टूर्नामेंट में एक से बढ़कर एक क्षमता वाले खिलाड़ी आए हैं। इनमें से एक ग्रेनो स्थित दुजाना गांव के दिव्यांग क्रिकेटर सचिन हैं। उनके दोनों हाथ की हथेलियां नहीं हैं। उनके हाथ में कोहनी के आगे बस कुछ हिस्सा है। इसके बावजूद गेंद और बल्ले पर उनकी पकड़ बेहद मजबूत है। वह जहां बल्ले से कमाल करते हैं तो वहीं बोलिंग और फील्डिंग भी सामान्य क्रिकेटरों की तरह ही करते हैं। काफी ऊंचाई पर आने वाले कैच भी वह आसानी से पकड़ लेते हैं। वह मास्टर ब्लास्टर सचिन की तरह बैटिंग कर चौके-छक्के जड़ने में सक्षम हैं। उन्होंने बताया कि वह यूपी की दिव्यांग टीम का हिस्सा होने के साथ ही स्थानीय टीम में सामान्य खिलाड़ियों के साथ भी खेलते हैं। उन्होंने बताया कि 2015 में बरेली में खेली गई शतकीय पारी सबसे ज्यादा यादगार है। मेरठ के प्रमोद कुमार भी यूपी की दिव्यांग टीम का हिस्सा हैं। वह एक हाथ से ही ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हैं। उनका सपना है कि वह दिव्यांग टीम के माध्यम से देश में अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने बताया कि अभी दिव्यांग टीम को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में बहुत बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद भी उनके प्रयास के अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे हैं। वह मेरठ से बीए कर रहे हैं और अपने कॉलेज की टीम से भी खेलते हैं।
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