Friday, July 17, 2020

फैन पर 'आलू' कहने पर नहीं भड़के थे इंजी: वकार July 17, 2020 at 07:40PM

नई दिल्ली भारत पाकिस्तान के एक मैच में () एक फैन पर इसलिए भड़क गए थे क्योंकि फैन्स उन्हें आलू-आलू कहकर चिढ़ा रहे थे। अगर अब तक आप भी यही मानते थे कि इंजमाम आलू कहने की वजह से भड़के थे तो आप शायद गलत हैं। पूर्व पाकिस्तानी कप्तान () ने बताया है कि इंजमाम आलू कहने की वजह से नहीं भड़के थे बल्कि वह उस फैन पर इसलिए भड़के थे क्योंकि वह भारतीय कप्तान की पत्नी को लेकर अश्लील कॉमेंट कर रहा था। उन दिनों मोहम्मद अजहरूद्दीन टीम इंडिया के कप्तान थे। वकार यूनिस ने उस लम्हे के बारे में बात करते हुए बताया, 'हां यह सही कि कुछ लोग उन्हें आलू-आलू कहकर बुला रहे थे। लेकिन उस भीड़ में एक व्यक्ति था जो अजहरूद्दीन की पत्नी पर अश्लील कॉमेंट्स कर रहा था। मेरे ख्याल से वह फैन काफी बकवास बोल रहा था और फिर इंजमाम तो इंजमाम हैं, उन्हें यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई थी।' वकार ने कहा, 'जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं कि उन दिनों भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच मैदान से बाहर अच्छी दोस्ती होती थी। इसी वजह से इंजी फैन्स से लड़ने पहुंच गए थे।' पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वकार यूनिस एक पोडकास्ट कार्यक्रम में इस प्रकरण पर बात कर रहे थे। बता दें भारत और पाकिस्तान के बीच यह मैच टोरंटो में साल 1997 में खेला जा रहा था। इस दौरान एक भारतीय फैन इंजमाम उल हक पर फब्तियां कस रहा था, जिससे इंंजमाम भड़क गए थे। वकार ने बताया, 'इस दौरान पाकिस्तानी टीम फील्डिंग पर थी और जब वह फैन फब्तियां कस रहा था तो इंजमाम ने कैप्टन को बोलकर अपनी फील्ड पोजिशन चेंज कराई और फिर टीम के 12वें खिलाड़ी से बैट बाहर मंगवाया। फिर इंजी बैट लेकर उस फैन की ओर दौड़ पड़े और उसे स्टैंड से खींचते हुए बाहर ले आए। इसके बाद मोहम्मद अजहरूद्दीन को मैदान पर आकर इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था।' बाद में इंजमाम उल हक पर इसके लिए दो मैच का बैन लगाया गया था। यूनिस ने कहा कि इंजी को इसके लिए सजा झेलनी पड़ी थी। वकार ने बताया, उन्होंने (इंजमाम) इस प्रकरण पर माफी भी मांगी थी। वह कोर्ट भी गए थे। बाद में यह मामला कोर्ट के बाहर सेटल हो गया। जो हुआ वह गलत था। लेकिन मैं आपको बता रहा हूं कि कैसे दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे के लिए खड़े रहते थे।

इंग्लैंड में अक्टूबर से फैंस को भी स्टेडियम में एंट्री मिल सकती है, 117 दिन बाद इंटरनेशनल क्रिकेट की वापसी भी इसी देश से हुई July 17, 2020 at 07:06PM

कोरोनावायरस के बीच इंग्लैंड सरकार अक्टूबर से दर्शकों के साथ खेल शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट भी तैयार किया है। इससे पहले कोरोना के बीच इंग्लैंड में जून से ही क्रिकेट, फुटबॉल और स्नूकर समेत कुछ खेल शुरू कर दिए गए हैं। यह सभी गेम्स बगैर दर्शकों के ही हो खेले जा रहे हैं।

इंग्लैंड से ही 117 दिन बाद इंटरनेशनल क्रिकेट की भी वापसी हुई है। यहां वेस्टइंडीज के साथ 8 जुलाई से तीन टेस्ट की सीरीज खेली जा रही है। फिलहाल, 16 जुलाई से इंग्लैंड-विंडीज के बीच मैनचेस्टर में दूसरा टेस्ट खेला जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने सुरक्षित माहौल में फैंस की एंट्री की बात कही
इंग्लैंड के प्रधानमंत्री बॉरिस जॉनसन ने कहा, ‘‘हम अक्टूबर से स्टेडियम में दर्शकों को एंट्री देने के साथ बिजनेस मीटिंग समेत कुछ जरुरी कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दे सकते हैं। हालांकि, यह सब पूरी तरह सुरक्षित माहौल में ही होगा।’’

जुलाई के आखिर में कुछ संख्या में दर्शकों को एंट्री मिल सकती है
सूत्रों की मानें तो ट्रायल के तौर पर जुलाई के आखिर या फिर अगस्त के शुरुआत में सीमित संख्या में दर्शकों को स्टेडियम में एंट्री दी जा सकती है। 31 जुलाई से वर्ल्ड स्नूकर चैम्पियनशिप और 1 अगस्त से शुरु होने वाले हॉर्स रेसिंग फेस्टिवल में यह ट्रायल किया जा सकता है।

पाकिस्तान को इंग्लैंड के खिलाफ 3 टेस्ट की सीरीज खेलनी है
पाकिस्तान को इंग्लैंड के खिलाफ अगस्त-सितंबर में 3 टेस्ट और इतने टी-20 मैचों की सीरीज खेलनी है। पहला टेस्ट 5 अगस्त से मैनचेस्टर में खेला जाएगा। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया टीम को सितंबर के आखिर से इंग्लैंड दौरे पर वनडे और टी-20 की सीरीज खेलना है।



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इंग्लैंड-वेस्टइंडीज के बीच तीन टेस्ट की सीरीज बगैर दर्शकों के खेली जा रही है। पहला मैच 8 जुलाई से हुआ था।

कोरोना मृतकों को दफना रहा यह वेटलिफ्टर July 17, 2020 at 06:49PM

पेटली पीटर, बेंगलुरुभारत के इस चैंपियन वेटलिफ्टर को इतना दर्द तो कभी 295 किलोग्राम के डेडलिफ्ट उठाते हुए भी नहीं महसूस हुआ, जितना अब हो रहा है। ने दो साल पहले इंटरनैशनल पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में इतना ही वजन उठाकर अपना दमखम दिखाया था। लेकिन इन दिनों अजमत कोविड- 19 के कारण मरन वाले लोगों के शवों को उठा रहे हैं और यह काम उन्हें अपने वेटलिफ्टिंग प्रफेशन से ज्यादा भारी दिख रहा है। समाज में शवों को उनकी अंतिम यात्रा तक पहुंचाने को भले ही सम्मान की नजर से देखा जाता है। लेकिन इनदिनों कोविड- 19 वायरस के खतरे को देखते हुए लोग मृतकों की अंतिम यात्रा से दूर ही रहते हैं। कई शवों के तो अंतिम संस्कार के लिए भी कोई नहीं है। अजमत ने ऐसे कई शवों को कब्रिस्तान ले जाकर उन्हें अपने दो साथियों के साथ दफनाया है। वह कहते हैं कि मृतकों को दफनाने अब कोई नहीं आता है। हम तीन लोग ही कई शवों को दफना चुके हैं। अजमत इस गंभीर वायरस से पूरी तरह सावधान हैं और वह अपनी सुरक्षा के सभी जरूरी उपाय इस्तेमाल में लाकर इस काम को अंजाम देते हैं। इसके अलावा उन्होंने खुद को परिजनों से दूर आइसोलेशन में रखा हुआ है। 43 वर्षीय अजमत ने कहते हैं, 'मैंने कई बार प्रैक्टिस में और कॉम्पिटीशन में भी 300 किलो के करीब वजन उठाया है। लेकिन जब मैंने अपने दो साथियों के साथ एक बुजुर्ग व्यक्ति के शव को क्रिश्चिन कब्रिस्तान मैदान में जाकर दफनाया, मुझे जो दर्द महसूस हुआ उसे मैं शब्दों में भी बयां नहीं कर सकता।' 5 फीट 8 इंच लंबे 108 किलो वजनी अजमत बताते हैं, 'उस बुजुर्ग के शव को दफनाने के लिए हम तीन ही लोग कब्रिस्तान में थे, जो उनकी अंतिम प्रार्थना कर रहे थे।' अजमत बेंगलुरु में एक आईटी फर्म से जुड़े हैं, जिन्होंने हाल ही में एक एनजीओ मर्सी एंजिल्स जॉइन किया है। यह एनजीओ इस शहर में कोविड-19 के कारण मरने वाले लोगों को शवों को उनकी अंतिम यात्रा तक पहुंचाने का काम कर रहा है। कोविड- 19 से पहले अजमत अपने वेटलिफ्टिंग स्पोर्स्टस में पूरे मन से मेहनत कर रहे थे। बीते साल दिसंबर में वह वर्ल्ड पावरलिफ्टिंग कांग्रेस (WPC) में हिस्सा लेने मॉस्को गए थे, जहां उन्होंने क्लासिर रो कैटिगरी 110 किलो भारवर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। इसके बाद मार्च में कोविड-19 का संक्रमण दुनिया भर में फैल गया और अजमत को भी अपने अगले कॉम्पीटीशन की तैयारियां छोड़नी पड़ीं। इसके बाद उन्होंने लॉकडाउन हटने के बाद अपने दो दोस्तों से शवों को कब्रिस्तान तक न पहुंच पाने की बात सुनी तो उन्होंने इस नेक काम के लिए यह एनजीओ जॉइन किया। अजमत अब तक 15 शवों को पूरे रीति-रिवाज के साथ दफनाने का काम कर चुके हैं।

बॉम्बे कोर्ट का आदेश- बीसीसीआई जुर्माने के तौर पर डेक्कन को 4800 करोड़ रुपए चुकाएगा; क्रिकेट बोर्ड फैसले को चुनौती दे सकता है July 17, 2020 at 06:14PM

इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की शुरुआती टीमों मे से एक डेक्कन चार्जर्स को बॉम्बे हाईकोर्ट से शुक्रवार को एक खुशखबरी मिली है। डेक्कन ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के खिलाफ आईपीएल से गलत तरीके से हटाने का आरोप लगाते हुए केस किया था। कोर्ट ने इस मामले में एक आर्बिट्रेटर नियुक्त किया था, जिसने डेक्कन के पक्ष में फैसला सुनाया। आर्बिट्रेटर ने बीसीसीआई को जुर्माने के दौर पर डेक्कन को 4800 करोड़ रुपए देने का फैसला सुनाया।

आईपीएल की शुरुआत 2008 से हुई है। इस दौरान डेक्कन क्रॉनिकल्स होल्डिंग्स लिमिटेड (डीसीएचएल) की टीम डेक्कन चार्जर्स ने बीसीसीआई के साथ 10 साल का करार किया था। हालांकि, अब बीसीसीआई आर्बिट्रेटर के फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दे सकता है।

अगस्त 2012 में डेक्कन को आईपीएल से हटाया
इसी बीच 11 अगस्त 2012 को बीसीसीआई ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए डेक्कन को बर्खास्त कर दिया था। इसके खिलाफ डीसीएचएल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद सितंबर 2012 में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस सीके ठक्कर को मामले में आर्बिट्रेटर नियुक्त किया था। डेक्कन के हटने के बाद सनराइजर्स हैदराबाद ने उसकी जगह ली थी।

डेक्कन ने 2009 में आईपीएल खिताब जीता था
डेक्कन चार्जर्स टीम आईपीएल में 4 साल (2008 से 2012) तक खेली। टीम ने एडम गिलक्रिष्ट की कप्तानी में 2009 में खिताब अपने नाम किया था। तब इन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बैंगलुरु को हराकर टूर्नामेंट जीता था। डीसीएचएल का पक्ष धीर एंड धीर एसोसिएट्स ने रखा था। वहीं, बीसीसीआई का पक्ष मनियर श्रीवास्तव एसोसिएट्स ने रखा था।



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डेक्कन चार्जर्स टीम आईपीएल में 4 साल (2008 से 2012) तक खेली। टीम ने एडम गिलक्रिष्ट की कप्तानी में 2009 में खिताब अपने नाम किया था।