Thursday, July 16, 2020

कपिल देव ने सुनाया किस्सा- क्यों बने फास्ट बोलर July 16, 2020 at 07:32PM

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट का रियल सिकंदर () को ही माना जाता है। कपिल टीम इंडिया के पहले ऐसे फास्ट बोलर थे, जिन्होंने बतौर तेज गेंदबाज दुनिया में अपनी पहचान बनाई। कपिल से पहले भारतीय क्रिकेट स्पिनर्स पर भी निर्भर होती थी। कपिल देव ने बताया कि अंडर-19 के दिनों में भारतीय क्रिकेट से जुड़े एक अधिकारी से उनकी बहस हो गई थी। इसके बाद उन्होंने तय कर लिया कि अब उन्हें फास्ट बोलर बनकर ही उन्हें दिखाना है। हाल ही कपिल देव पूर्व भारतीय क्रिकेटर और वर्तमान में महिला भारतीय टीम के कोच WV रमन () के यूट्यूब चैनल 'इनसाइड आउट विद WV रमन' में बात करने के लिए मुखातिब हुए। यहां रमन ने कार्यक्रम की शुरुआत में ही कपिल देव से उनके फास्ट बोलर बनने की कहानी पूछी। कपिल देव ने बताया, 'स्कूल के दिनों में ही मेरी लंबाई और शरीर अच्छा था। तब हम क्रिकेट खेलते थे तो स्कूल मैनेजमेंट ने ही मेरी ओर नया बॉल फेंक दिया। हट्टे-कट्टे शरीर का मतलब था कि फास्ट बोलिंग करो। मैंने पहला ही गेंद फेंका तो उसकी स्पीड देखकर वहां मौजूद लोगों ने बहुत तारीफ की और उन्होंने मुझे फास्ट बोलिंग करने के लिए ही प्रेरित किया।' देखें- WV रमन के साथ कपिल देव का यह पूरा इंटरव्यू लेकिन फास्ट बोलर बनने का असली किस्सा यह नहीं था वह था अंडर 19 क्रिकेट का एक कैंप। यहां कपिल देव अंडर 19 कैंप में पहुंचे हुए थे तो उनकी किसी बात पर भारतीय क्रिकेट के एक अधिकारी से बहस हो गई। इस दौरान उस अधिकारी ने कपिल से पूछ लिया कि आखिर आप करते क्या हैं। उन्होंने कहा कि मैं फास्ट बोलर हूं। इस अधिकारी ने कपिल देव को प्रोत्साहन देने की बजाए उनका मनोबल गिराने का प्रयास किया और कहा, 'भारत में तो कभी कोई फास्ट बोलर हुए ही नहीं हैं।' कपिल ने यहां मन ही मन यह तय कर लिया कि उन्हें इस व्यक्ति को गलत साबित करना है और टीम इंडिया में बतौर फास्ट बोलर खेलकर दिखाना है। अपने करियर की शुरुआत में भारतीय टीम इस युवा तेज गेंदबाज पर बहुत निर्भर होती थी। सचिन टीम इंडिया की फील्डिंग के दौरान प्रतिदिन 30-30 ओवर बोलिंग किया करते थे। कपिल ने कहा कि उन दिनों मुझे फास्ट बोलिंग करने का बहुत शौक था और मैं 30-30 ओवर फेंकने का आदी अपनी घरेलू टीम से ही था। इसलिए मुझे बोलिंग करने में खूब मजा आता था।

सचिन के इस 'त्याग' ने बनाया वीरू को ओपनर July 16, 2020 at 06:37PM

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विकेटकीपर अजय रात्रा (Ajay Ratra) ने खुलासा किया है कि कैसे () ने () के लिए अपनी ओपनिंग पोजीशन छोड़ दी। रात्रा ने कहा कि सौरभ गांगुली (Sourav Ganguly) और सचिन तेंडुलकर दोनों को सहवाग को ओपनिंग करवाने का श्रेय दिया जाना चाहिए। एक अंग्रेजी अखबार के साथ बातचीत में रात्रा ने कहा, 'सचिन सलामी बल्लेबाज के तौर पर बहुत अच्छा कर रहे थे लेकिन सहवाग को ओपनिंग करवानी था। तो सचिन ने नंबर 4 पर बल्लेबाजी करने का प्रस्ताव दिया। इसके बाद गांगुली के साथ सहवाग ने पारी की शुरुआत की ताकि दाएं और बाएं हाथ के बल्लेबाज का कॉम्बिनेशन बना रहे। अगर सचिन राजी नहीं होते तो वीरेंदर सहवाग को शायद निचले क्रम में ही बल्लेबाजी करनी पड़ती। सहवाग को वनडे में पारी की शुरुआत करने का मौका शायद नहीं मिलता और तब परिस्थितियां काफी अलग होतीं।' साल 2001 में श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ त्रिकोणीय सीरीज में सचिन तेंडुलकर चोट के कारण बैंच पर थे। तब गांगुली ने पारी की शुरुआत के लिए युवराज सिंह और अमय खुरसिया को टॉप ऑर्डर पर भेजा, लेकिन यह फैसला उलट साबित हुआ। वीरेंदर सहवाग दूसरी ओर मिडल-ऑर्डर में सेटल नहीं हो पा रहे थे। यही वजह थी कि वीरेंदर सहवाग को ओपनिंग के लिए प्रमोट किया गया।

लॉकडाउन: बजरंग पूनिया के कोच की सैलरी में बड़ी कटौती July 16, 2020 at 05:56PM

साबी हुसैन, नई दिल्ली फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारतीय महिला कुश्ती टीम के कोच एंड्रयू कुक को अनौपचारिक रूप से हटाने के बाद अब भारत के दिग्गज के पर्सनल कोच शैको बेंटिन्डिस की बारी है। शैको बेंटिन्डिस को रेसलिंग फेडरेशनल ऑफ इंडिया (WFI) की नई सूचना के अब यह तय करना है कि भारत की नौकरी को चुनें या फिर अपनी सैलरी को। कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते शैको अभी तक जॉर्जिया में अपने घर से वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे और वह बजरंग को अपने घर से ही ऑनलाइन ट्रेनिंग सेशन करा रहे थे। WFI ने 44 वर्षीय इस कोच को यह बता दिया है कि उन्हें एक और सैलरी कट के लिए तैयार रहना होगा। शैको का लॉकडाउन से पहले भारतीय रेसलिंग फेडरेशन के साथ करार हुआ था। तब उनकी सैलरी करीब 6000 डॉलर यानी करीब साढ़े चार रुपये तय की गई थी। मार्च में वह वापस अपने वतन जॉर्जिया लौट गए। क्योंकि तब भारत में कोविड- 19 के चलते सोनीपत और लखनऊ में आयोजित हो रहे रेसलिंग कैंप को स्थगित कर दिया गया था। बता दें शैको बजरंग के पर्सनल कोच होते हुए भी WFI के पे-रोल पर हैं और उनकी सैलरी फेडरेशन के मुख्य स्पॉन्सर टाटा मोटर्स से आती है। लॉकडाउन के पहले दो महीनो में शैको को वर्क फ्रॉम होम (WFM) सेवा के लिए पूरी सैलरी मिली थी। इसके बाद फेडरेशन ने उनकी सैलरी में 30 फीसदी कटौती की बात कही, जिसे उन्होंने न चाहते हुए भी मान लिया। लेकिन अब WFI चाहता है कि उनकी सैलरी में और कटौती की जरूरत है। फेडरेशन के मुताबिक टाटा मोटर्स इस बात से खुश नहीं है कि उन्हें ऑनलाइन क्लास के लिए तीन लाख रुपये प्रतिमाह से ज्यादा का भुगतान किया जा रहा है। अब WFI शैको की सैलरी में और 20 फीसदी की कटौती चाहता है, जो उनकी पहली तय सैलरी की आधी (करीब 3000 डॉलर) हो जाएगी। अगर जॉर्जिया के यह कोच इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर देते हैं तो फिर उनकी यह जॉब जाने का खतरा होगा।

मैनचेस्टर टेस्ट: सचिन को पसंद आई होल्डर की यह बात July 16, 2020 at 04:54PM

नई दिल्ली मास्टर ब्लास्टर () भी मैनचेस्टर में इंग्लैंड और वेस्टइंडीज के बीच खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच का लुत्फ उठा रहे हैं। इस मैच से जुड़े अहम बातों पर तेंडुलकर ट्वीट कर फैन्स के साथ अपनी राय भी शेयर कर रहे हैं। गुरुवार को इस मैच पर उन्होंने दो ट्वीट किए। अपने एक ट्वीट सचिन ने () की कप्तानी की भी जमकर तारीफ की है। मैच के पहले सत्र के खेल के बाद सचिन ने ट्वीट किया, 'पहले सेशन में मैंने नोटिस किया कि कुछ बॉल कीपर तक नहीं पहुंच रही थी। यह साफ संकेत है कि पिच में नमी है। ऐसे ट्रैक पर जेसन होल्डर ने स्पिनर को लाकर स्मार्ट चाल चली है, जहां पर कोई गेंद ग्रिप कर सकती है और कोई गेंद सीधी जा सकती है।' इसके बाद दूसरे सत्र में डॉमनिक सिबले और कप्तान जो रूट ने इंग्लिश पारी को समय रहते मजबूती से संभाल लिया। सचिन ने एक और ट्वीट करते हुए इस साझेदारी को महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने लिखा, 'रूट और सिबले गंभीर साझेदारी निभा रहे हैं। वेस्टइंडीज को यह साझेदारी तोड़ने के लिए कोई राह ढूंढनी होगी, जबकि बॉल बिल्कुल नई है। ओल्ड ट्रैफर्ड की पिच सख्त है, जब यह सूखेगा तो बॉल सॉफ्ट हो जाएगी। यहां इस बात खासी उपयोगिता रहेगी की टीमें नई गेंद को कैसे खेलती हैं।'