टेस्ट क्रिकेट में जल्द कन्कशन की तरह कोरोना सब्स्टीट्यूट का नियम लागू हो सकता है। इस संबंध में इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) के प्रस्ताव को जल्द ही इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को मंजूरी मिल सकती है।प्रस्ताव के मुताबिक, अगर टेस्ट मैच के दौरान खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है तो उसकी जगह सब्स्टीट्यूट को मैदान पर उतारा जा सकेगा।
ईसीबी के डायरेक्टर ऑफ स्पेशल प्रोजेक्ट्स स्टीव एलवर्थी के स्काईस्पोर्ट्स को बताया कि कोविड-19 सब्स्टीट्यूट को लेकर आईसीसी को हमने प्रस्ताव भेजा था, जिस पर चर्चा हो रही है। मुझे उम्मीद है कि इसे जल्द ही आईसीसी की मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि, यह सिर्फ टेस्ट क्रिकेट में भी अमल में लाया जाएगा। फिलहाल, वनडे और टी-20 में इसे नहीं लागू किया जाएगा।
खिलाड़ी के रिप्लेसमेंट का आधार एक ही होगा। अगर कोई बल्लेबाज कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो उसकी जगह बल्लेबाज ही टीम में आएगा। गेंदबाज के मामले में भी ऐसा ही होगा।
कोरोना संक्रमित होने पर खिलाड़ी आइसोलेट होगा
उन्होंने आगे बताया कि खिलाड़ी के कोरोना संक्रमित होने की सूरत में सबसे पहले स्टेडियम में मौजूद कोविड डॉक्टर और इंग्लैंड के पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी दी जाएगी और फिर संबंधित खिलाड़ी को आइसोलेशन में भेज दिया जाएगा।
जुलाई में इंग्लैंड-वेस्टइंडीज के बीच 3 मैचों की टेस्ट सीरीज
कोरोना सब्स्टीट्यूट का नियम इंग्लैंड-वेस्टइंडीज के बीच 8 जुलाई से शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज में लागू हो सकता है। दोनों देशों के बीच में तीन टेस्ट खेले जाने हैं। सभी मुकाबले बायो सिक्योर (संक्रमण रहित) स्टेडियम में होंगे। इसके लिए विंडीज टीम अगले हफ्ते मंगलवार को चार्टर्ड फ्लाइट से इंग्लैंड पहुंचेगी। 14 सदस्यीय टीम के अलावा 11 रिजर्व खिलाड़ी भी रहेंगे। इन्हें तीन हफ्ते के लिए ओल्ड ट्रैफर्ड में रखा जाएगा। यहां ट्रेनिंग के साथ ही खिलाड़ियों को सेल्फ क्वारैंटाइन में रहना होगा।
कब लागू हुआ था कन्कशन सब्स्टीट्यूट?
कन्कशन सब्स्टीट्यूट का नियम पिछले साल अगस्त में इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया के बीचएशेज सीरीज से लागू हुआ था। इसके मुताबिक, मैच के दौरान अगर कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो उसकी जगह दूसरा खिलाड़ी ले सकेगा। बल्लेबाज के चोटिल होने पर बल्लेबाज और गेंदबाज के साथ ऐसा होने की सूरत मेंगेंदबाज को ही प्लेइंग-11 में शामिल किया जा सकता है। कन्कशन सब्स्टीट्यूट को मैदान पर उतारने का फैसला मैच रेफरी करेंगे। इससे पहले सब्स्टीट्यूट खिलाड़ी को सिर्फ फील्डिंग की छूट दी जाती थी।
फिलिप ह्यूज की मौत के बाद इस पर पहली बार चर्चा हुई
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व ओपनर फिलिप ह्यूज के निधन के बाद इस नियम को लेकर चर्चाएं शुरू हुईं थीं। ह्यूज को 2014 में शेफील्ड शील्ड टूर्नामेंट के एक मैच में सिर पर बाउंसर लगी थी। इसके बाद ह्यूज को अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका था। अभी इस नियम को 2 साल के लिए ही लागू किया गया है। समीक्षा के बाद इसे आगे बढ़ाया जाएगा
ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में सबसे पहले इस्तेमाल हुआ
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 2016-17 सीजन में कन्कशन सब्स्टीट्यूट के नियम का इस्तेमाल घरेलू वनडे (पुरुष-महिला दोनों), बिग बैश और महिला बिग बैश सीरीज में किया था। आईसीसी से इस नियम को मंजूरी नहीं मिलने के कारण वह शेफील्ड शील्ड और अन्य प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में इसका इस्तेमाल नहीं कर सका था। इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने 2018 में काउंटी में इसे लागू किया था।
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