Monday, April 27, 2020

9 साल बाद भी इससे उबर नहीं पाए हैं सईद अजमल April 27, 2020 at 08:00PM

कराची पाकिस्तान के पूर्व ऑफ स्पिनर सईद अजमल () विश्व कप 2011 (World Cup 2011) में भारत के खिलाफ सेमीफाइनल में सचिन तेंडुलकर का विकेट नहीं मिल पाने की निराशा से अब तक नहीं उबर पाए हैं क्योंकि उन्हें आज भी लगता है कि उन्होंने भारतीय स्टार को आउट कर दिया था। इंग्लैंड के अंपायर इयान गाउल्ड ने भी हाल में कहा था कि तेंडुलकर तब आउट थे लेकिन तीसरे अंपायर ने उनका फैसला पलट दिया था। तेंडुलकर ने मोहाली में खेले गए सेमीफाइनल में 85 रन बनाए थे जिससे भारत यह मैच जीतने में सफल रहा था। तेंडुलकर जब 23 रन पर खेल रहे थे तब गाउल्ड ने अजमल की गेंद पर उन्हें पगबाधा आउट दे दिया था लेकिन तीसरे अंपायर बिली बोडेन ने ‘रिव्यू’ के बाद इसे पलट दिया था। आईसीसी एलीट पैनल के सदस्य रहे गाउल्ड ने हाल में कहा था कि वह तेंडुलकर को आउट देने के अपने फैसले पर कायम हैं। अजमल ने उस घटना को याद करते हुए कहा, ‘यह सीधी गेंद थी और विकेटों के आगे उनके पैड से टकराई थी। मुझे पूरा विश्वास था कि वह आउट हैं। शाहिद अफरीदी, कामरान अकमल, वहाब रियाज और अन्य खिलाड़ियों ने मुझसे पूछा था कि क्या वह (तेंडुलकर) आउट हैं और मैंने कहा कि हां उसकी पारी समाप्त हो गई है।’ उन्होंने कहा कि जब तीसरे अंपायर ने फैसला बदला तो उनका दिल टूट गया था। अजमल ने कहा, ‘मुझे टेस्ट मैचों में कभी उन्हें गेंदबाजी करने का मौका नहीं मिला इसलिए मुझे जब भी सीमित ओवरों की क्रिकेट में उनके खिलाफ खेलने का मौका मिलता था तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहता था।’ उन्होंने एक टेलीविजन चैनल से कहा, ‘सबसे अधिक निराशा यह रही कि हम सेमीफाइनल में हार गये और निश्चित तौर पर तेंडुलकर के 85 रन ने अंतर पैदा किया था।’ अजमल ने कहा, ‘यहां तक कि आज भी तीसरे अंपायर का फैसला मुझे हैरान कर देता है। लेकिन उस दिन भाग्य उनके साथ था और उन्होंने अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण पारी खेली।’ पाकिस्तान की तरफ से 35 टेस्ट, 113 वनडे और 64 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले अजमल ने कहा कि तीसरे अंपायर के फैसला पलटने से गाउल्ड भी निराश थे। इस ऑफ स्पिनर का करियर हालांकि बांग्लादेश दौरे के बाद बीच में ही समाप्त हो गया। उनके गेंदबाजी ऐक्शन की 2014 में रिपोर्ट की गई थी। वह इसमें सुधार नहीं कर पाए और 2017 में उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कह दिया था।

अगले साल भी काबू नहीं आया कोरोना वायरस तो रद्द होंगे तोक्यो ओलिंपिक खेल: आयोजन समिति अध्यक्ष April 27, 2020 at 07:59PM

तोक्यो कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के चलते को अगले साल के लिए टाल दिया गया है। पर अब भी खेलों के इस महाकुंभ पर छाया संकट समाप्त नहीं हुआ है। आयोजन समिति के अध्यक्ष ने कहा है कि अगर अगले साल तक भी कोरोना वायरस पर नियंत्रण नहीं पाया जा सका तो इन खेलों को रद्द कर दिया जाएगा। जापान के अखबार निकन स्पोर्ट्स डेली के साथ इंटरव्यू में तोक्यो 2020 के अध्यक्ष योशिरो मोरी ने कहा कि अगर दुनिया कोरोना वायरस महामारी की चपेट में घिरी रहती है तो खेलों को 2021 से आगे नहीं टाला जा सकता है। इन परिस्थिति में उसे कैंसल ही करना होगा।

एशेज से बड़ी है भारत-पाक सीरीज, ICC दे ध्यान: सकलैन April 27, 2020 at 07:18PM

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच कोई द्विपक्षीय सीरीज कब होगी इसका भले अभी तक किसी को कुछ पता नहीं है लेकिन पाकिस्तान के पूर्व खिलाड़ियों ने इसके लिए माहौल बनाना तैयार कर दिया है। अब पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज स्पिनर () भी चाहते हैं कि दोनों देशों (India vs Pakistan) को अपनी क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता जारी रखनी चाहिए। मुश्ताक के मुताबिक, दोनों देशों के बीच में खेली जाने वाली सीरीज एशेज से भी बहुत बड़ी सीरीज है। सकलेन मुश्ताक ने कहा कि दोनों देश अगर यह सीरीज खेलते हैं तो यह दोनों के लिए विन-विन वाली स्थिति है। इसमें खेल और वित्तीय लिहाज से भी दोनों बोर्ड को लाभ होगा और इसके दोनों देशों के आपसी संबंध (Indo-Pak Relation) भी सुधारने में मदद मिल सकती है। इन दिनों सबसे पहले पूर्व पाकिस्तानी तेज गेंदबाज () ने यह प्रस्ताव रखा था कि भारत-पाकिस्तान को कोविड- 19 के खिलाफ फंड इकट्ठा करने के मकसद से एक वनडे सीरीज खेलनी चाहिए। भारत में इसे कहीं से भी कोई समर्थन नहीं मिला था और पूर्व कप्तान कपिल देव, सुनील गावसकर और मदद लाल ने इसे बकवास करार दिया। लेकिन पाकिस्तान ने अख्तर की इस मांग को लगातार समर्थन मिला है। सबसे पहले शाहिद अफरीदी ने इस मांग को सही करार दिया था और अब इस पूर्व स्पिनर ने भी इसका समर्थन किया है। इस 43 वर्षीय पूर्व ऑफ स्पिनर ने पीटीआई से कहा, 'आप खिलाड़ियों को क्या कहते हैं? आप उन्हें हीरो कहते हैं और उनका काम क्या है? उनका काम अच्छा खेल दिखाना है। हारना या जीतना खेल का हिस्सा है। क्रिकेट कोई युद्ध नहीं है। इसलिए मैं चाहता हूं कि दोनों देशों के बीच क्रिकेट खेला जाना चाहिए।' अपने करियर में 44 टेस्ट और 169 वनडे मैच खेलने वाले इस दिग्गज गेंदबाज ने कहा, 'इसे इस नजरिए से नहीं देखना चाहिए कि पाकिस्तान भारत से नहीं खेल रहा है तो उसे नुकसान हो रहा है। इसकी बड़ी तस्वीर देखी जानी चाहिए। दोनों देशों को खेल को प्रमोट करना चाहिए। और अगर हम दोनों खेलते हैं तो यह विन-विन (जीत और जीत) की स्थिति होगी। संभवत: दोनों के संबंधों में भी सुधार आए।' 496 इंटरनैशनल विकेट लेने वाले इस गेंदबाज ने कहा, 'यह दोनों देशों को करीब ला सकता है। मैं आईसीसी से प्रार्थना करता हूं कि वह इस मामले में दखल दे। वित्तीय रूप से यह बीसीसीआई और पीसीबी के लिए विन-विन स्थिति है। यह सीरीज एशेज से भी बहुत बड़ी सीरीज है।'

हैपी बर्थडे एंडी- मैदान पर दिखाया था 'जिगरा' April 27, 2020 at 07:39PM

नई दिल्ली अगर आपने 1990 के दशक के अंतिम वर्षों और अगली शताब्दी के शुरुआती वर्षों का क्रिकेट देखा है तो एक नाम आपके जेहन में जरूर होगा। एंडी फ्लावर। जी, वही (Andy Flower) जिनकी गिनती कभी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाजों में होती थी। कमाल का बल्लेबाज, शानदार विकेटकीपर और ऊपर से कप्तान। इस खिलाड़ी ने कई रोल निभाए। वह जिम्बाब्वे (Zimbabwe Cricket Team) की उस टीम का हिस्सा थे जो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने कदम मजबूत करने में जुटी थी। आज उन्हीं ऐंडी फ्लावर का जन्मदिन () है। आज ही के दिन 1968 में उनका जन्म हुआ। 63 टेस्ट मैचों में 51.54 के औसत से 4794 रन बनाने वाले एंडी को रिवर्स स्वीप (Reverse Sweep) का बादशाह माना जाता था। भारत दौरे पर भी उन्होंने लगातार यह शॉट खेलकर काफी परेशान किया। वह अपनी टीम के सबसे मजबूत बल्लेबाज थे और दुनियाभर के गेंदबाजों के लिए सिरदर्द। नवंबर 2000 से लेकर नवंबर 2001 तक फ्लावर के करियर का सबसे सुनहरा दौर रहा। उन्होंने 133.27 के औसत से 1466 रन बनाए। इसमें मजबूत साउथ अफ्रीका के खिलाफ हरारे टेस्ट मैच में 142 और 199 नॉट आउट की पारियां काफी अहम रहीं। ये पारियां इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती हैं क्योंकि जिम्बाब्वे के सिर्फ तीन बल्लेबाज ही 20 तक ही पहुंच पाए थे। यह साल 2003 का वर्ल्ड कप था। साउथ अफ्रीका, केन्या और जिम्बाब्वे में खेला जा रहा था। जिम्बाब्वे में लोकतंत्र को दबाए जाने की चर्चाएं आम थीं। फ्लावर ने हाथ पर काली पट्टी बांध अपने देश में 'लोकतंत्र की मृत्यु' के खिलाफ विरोध जताया। इसके बाद उन्हें क्रिकेट से संन्यास लेना पड़ा। फ्लावर इसके बाद भी क्रिकेट से जुड़े रहे। इस बार कोचिंग के जरिए। वह पांच साल तक इंग्लैंड के कोच रहे। साल 2009 से उनकी कोचिंग में इंग्लैंड ने अपनी धरती और ऑस्ट्रेलिया में एशेज जीती। साल 2010 में अपनी पहली आईसीसी ट्रोफी (वर्ल्ड टी20) जीती, नंबर वन टेस्ट टीम बने और साथ ही भारत में दो दशक में पहली बार टेस्ट सीरीज भी जीती।