Sunday, February 2, 2020

शाकाहार, योग और ध्यान... ऐसे टॉप पर पहुंचे जोकोविच February 02, 2020 at 06:50PM

मेलबर्न8वां ऑस्ट्रेलियाई ओपन खिताब जीतकर महानतम टेनिस खिलाड़ियों की जमात में शामिल होने वाले ने इस शानदार फॉर्म का श्रेय शाकाहार, योग और ध्यान को दिया है। युद्ध झेलने वाले बेलग्राद में पैदा हुए सर्बिया के इस टेनिस स्टार ने सूखे स्विमिंग पूल में अभ्यास करके टेनिस का ककहरा सीखा। अब रेकॉर्ड 14 करोड़ डॉलर इनामी राशि के साथ मोंटे कार्लो में महल सरीखे घर में रहते हैं। अपने करियर में कई उतार चढ़ाव झेल चुके जोकोविच अब पहले से अधिक परिपक्व और मंझे हुए नजर आते हैं। पिछले साल करीब पांच घंटे चला विंबलडन फाइनल और 2012 में पांच घंटे 53 मिनट तक चला ऑस्ट्रेलियाई ओपन फाइनल उन्होंने जीता। अब तक 17 ग्रैंड स्लैम जीत चुके 32 वर्ष के जोकोविच की नजरें रोजर फेडरर और रफेल नडाल का रेकॉर्ड तोड़ने पर लगी है। जोकोविच की दिनचर्या अनूठी और अनुकरणीय है। वह सूर्योदय से पहले अपने परिवार के साथ उठ जाते हैं, सूर्योदय देखते हैं और उसके बाद परिवार को गले लगाते हैं, साथ में गाते हैं और योग करते हैं। दो बच्चों के पिता जोकोविच पूरी तरह से शाकाहारी हैं। पढ़ें- नेटफ्लिक्स की डाक्यूमेंट्री ‘द गेम चेंजर्स’ में उन्होंने कहा, ‘उम्मीद है कि मैं दूसरे खिलाड़ियों को शाकाहार अपनाने के लिए प्रेरित कर सकूंगा।’ 8वां ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीतने का जश्न उन्होंने पार्टी करके नहीं बल्कि शहर के बोटेनिकल गार्डन में अंजीर के पेड़ पर चढ़कर मनाया। उन्होंने कहा, ‘यह ब्राजीली अंजीर का पेड़ मेरा दोस्त है जिस पर चढ़ना मुझे पसंद है। यह मेरा सबसे मनपसंद काम है।’ पहली बार 2008 में ऑस्ट्रेलियाई ओपन जीतने वाले जोकोविच ने 2011 से 2016 के बीच में 24 में से 11 ग्रैंड स्लैम जीते और सात के फाइनल में पहुंचे। इसके बाद वह खराब दौर और कोहनी की चोट से जूझते रहे लेकिन 2017 विंबलडन के बाद फॉर्म में लौटे। इस बीच उन्होंने अध्यात्म की शरण ली और लंबे ध्यान सत्रों में भाग लिया। इसने उन्हें अधिक सहनशील और संतुष्ट बनाया।

विडियो- आपने देखा चहल और अय्यर का विक्ट्री डांस February 02, 2020 at 08:20PM

माउंट माउंगानुईभारतीय क्रिकेट टीम ने माउंट माउंगानुई में रविवार को न्यू जीलैंड को टी-20 सीरीज के 5वें और आखिरी मुकाबले में 7 रनों से हरा दिया। इस जीत के साथ ही भारत ने सीरीज को एकतरफा 5-0 से अपने नाम किया और 5 मैचों की T20 सीरीज के सभी मुकाबले जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बनी। इस खास मौके पर भारतीय क्रिकेट टीम के ऑफिशल इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक विडियो शेयर किया गया है। विडियो में करिश्माई स्पिनर और मिडल ऑर्डर के विस्फोटक बल्लेबाज खास डांस मूव्स करते हुए दिख रहे हैं। पेज पर विडियो के कैप्शन लिखा गया है- विक्ट्री डांस..। यह विडियो मैच खत्म होने के तुरंत बाद शूट किया गया है। इस पर क्रिकेट फैन्स की जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक फैन ने इसे बड़ी जीत बताते हुए कॉमेंट किया- बड़ी जीत है... डांस तो बनता ही है..। बता दें कि भारतीय टीम ने पहले बैटिंग करते हुए 20 ओवरों 3 विकेट पर 163 रन बनाए। जवाब में न्यू जीलैंड की टीम 9 विकेट पर 156 रन ही बना सकी। रोचक बात यह है कि भारत ने न्यू जीलैंड में पहली बार टी-20 सीरीज में जीत हासिल की है। सीरीज पर नजर डाली जाए तो पहला और दूसरा मैच भारत ने ऑकलैंड में जीते थे, जबकि तीसरा और चौथा मैच क्रमश: हैमिल्टन और वेलिंग्टन में खेला गया था, जहां भारत ने सुपर ओवर में जीत दर्ज की थी। 5वां मैच माउंट माउंगानुई में भारत ने 7 रन से जीता।

टेस्ट में फेल पाक खिलाड़ी ने ट्रेनर के सामने उतारे कपड़े February 02, 2020 at 07:38PM

कराचीइंटरनैशनल टीम में जगह बनाने के लिए जूझ रहे पाकिस्तान के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज उमर अकमल पर गंभीर आरोप लगे हें। रिपोर्ट्स की मानें तो उमर ने नैशनल क्रिकेट अकैडमी में लिए गए फिटनेस टेस्ट में फेल होने के बाद कुछ ऐसा कर दिया जो उन्हें भारी नुकसान पहुंचा सकता है। खबरों के अनुसार, फिटनेस टेस्ट के दौरान उमर अकमल के शरीर का फैट मापा गया, जिसमें वह फेल रहे। इस बात से भड़के छोटे अकमल ने ट्रेनर के सामने ही अपने सारे कपड़े उतार दिए। यही नहीं, उन्होंने ट्रेनर के साथ बदतमीजी भी की। उन्होंने कपड़े उतारकर ट्रेनर पर चिल्लाते हुए उल्टे पूछा- बताओ फैट कहां है? फिटनेस लेने वाली टीम ने उनकी शिकायत पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) से कर कर दी है। माना जा रहा है कि इस व्यवहार के लिए उमर पर बैन लगाया जा सकता है और अगले घरेलू सीजन से भी बाहर रखा जा सकता है। दूसरी ओर, उमर के बड़े भाई कामरान और पूर्व कप्तान सलमान बट्ट भी टेस्ट में फेल हो गए हैं। यह पहली बार नहीं है, जब उमर अपने खराब व्यवहार की वजह से सुर्खियों में हैं। इससे पहले भी कई बार वह विवादों में रहे हैं। वर्ष 2017 को ही ले लिया जाए्। उस वक्त उन्हें इंग्लैंड में खेली गई चैंपियंस ट्रोफी से वापस पाकिस्तान भेज दिया गया था। उस वक्त फिटनेस टेस्ट में फेल होने पर अकमल के खिलाफ तत्कालीन कोच मिकी आर्थर ने कार्रवाई की थी। इससे जुड़ी दूसरी खबर यह है कि उमर के अलावा कामरान अकमल और सलमान बट्ट भी फिटनेस टेस्ट में फेल हुए हैं। दरअसल, कामरान को कई बार टेस्ट के लिए बुलाया गया, लेकिन वह लगातार बहाना बनाते रहे। आखिरकर 28 जनवरी को वह अकैडमी पहुंचे तो टेस्ट में फेल हो गए। उनके अलावा बट्ट ने तो फिटनेस टेस्ट पूरा दिया ही नहीं। वह फिटनेस को छोड़कर चलते बने। माना जा रहा है कि उनपर भी कोर्रवाई हो सकती है। उल्लेखनीय है कि इन तीनों खिलाड़ियों को पीसीबी का कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिला है और न ही उनकी घरेलू टीम ने करार किया है। ये तीनों खिलाड़ी बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के ही अपनी-अपनी टीमों के लिए खेल रहे हैं।

42 साल से खदान मजदूर आदिवासी गांव में करा रहे टूर्नामेंट, 170 लोगों को इसमें खेलने से नौकरी मिली February 02, 2020 at 07:55PM

मुकेश महतो,उदयपुर.यह है फुटबॉल विलेज जावर माइंस। यहां देश की सबसे बड़ी जिंक खदानें हैं। लेकिन देश भर में इस आदिवासी गांव की पहचान मोहन कुमार मंगलम फुटबॉल टूर्नामेंट से है, जिसे पिछले 42 साल से खदान मजदूर करा रहे हैं। यहां पढ़ाई से ज्यादा फुटबॉल खेलकर लोगों को रोजगार मिलता है। इस गांव और आसपास 170 से अधिक लोग हैं, जो कभी इस टूर्नामेंट में खेले और इसी के दम पर कोई स्कूल में पीटीआई है तो कोई पुलिस सब इंस्पेक्टर। इस गांव के टूर्नामेंट से ही उभरने वाले कई खिलाड़ी भारतीय फुटबॉल टीम में कप्तान भी रह चुके।

राजस्थान के सबसे अनूठे फुटबॉल टूर्नामेंट मोहन कुमार मंगलम का फाइनल रविवार को एयरफोर्स दिल्ली और सिख रेजिमेंट जालंधर के बीच खेला गया। इसमें जालंधर ने एयरफोर्स की टीम को 2-0 से हरा दिया।

कभी पंचर फुटबॉल से खेलते थे, आज सभी बड़ी टीमें खेलने आती

इस गांव के 82 साल के रहमान खान पिछले 42 साल से हर टूर्नामेंट देखने आते हैं। वेटूर्नामेंट कापहला मैच खेलने वाले खिलाड़ी भी रहे हैं। उन्होंने बताया किइसकी शुरुआत4-5 लोगों के फुटबॉल खेलने से हुई।कई बार पंचर फुटबाल से ही लोगों ने प्रैक्टिस की। फिर यह अभ्यास मैच में बदला और बाद मेंमोहन कुमार टूर्नामेंट शुरू हुआ। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसाआयोजन हो जाएगा कि इससे देश के लिए खेलने वाले खिलाड़ी भी निकलेंगे। आज कोई ऐसा राज्य नहीं, जहां से टीमें आवेदन नहीं करती।

एमकेएम फुटबॉल टूर्नामेंट महिलाओं की बराबरीका संदेश देता है

यहां महिलाओं को बराबरी का अधिकार मिलता है। स्टेडियम का एक हिस्सा पूरी तरह से उनके लिए रिजर्व रहता है जहां सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, छात्राएं और बच्चियां बैठकर मैच देखती हैं। मैच देखने आई गांव की कमलाबाई बताती हैं कि यह टूर्नामेंट खेल के साथ एकता, समानता और आदिवासियों के खुले पारिवारिक माहौल की तस्वीर बयां करता है। मैच का उत्साह किसी पर्व से कम नहीं रहता। वे बताती हैं कि पूरे दस दिन घरों में भी पर्व जैसा माहौल रहता है।

उदयपुर शहर से लोग टूर्नामेंट देखने आते हैं

उदयपुर शहर से मैच देखने जाने वाली कोमल शर्मा बताती हैं कि उन्हें हर साल इस टूर्नामेंट का इंतजार रहता है। कहती हैं कि वह खुद फुटबॉल की फैन हैं, इसलिए फाइनल देखने परिवार के साथ आती हैं। वे बताती हैं यहां ग्रामीण बालिकाओं और महिलाओं में खेल को लेकर जो क्रेज देखने को मिलता है, वह शायद ही देश में कहीं हो। 10 साल की पारुल भी मैच इंजॉय करते हुए कहती है कि वह मैच से 2 घंटे पहले ही यहां आकर बैठ जाती है, वरना उसे पहाड़ी पर चढ़कर मैच देखना पड़ता है।

हजारों लोगों के जुटने के बाद भी आज तक थाने में कोई शिकायत नहीं हुई

एमकेएम टूर्नामेंट की खास बात यह है कि इसके प्रबंधन का जिम्मा अब भी जिंक खदान के मजदूरों पर है। आयोजकों के अनुसार दस दिन के कार्यक्रम में कई गांवों से हजारों लोग जुटते हैं। लेकिन कभी चोरी, लड़ाई या ऐसी किसी घटना की थाने में शिकायत नहीं मिली।



Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
लोग पहाड़ पर बैठकर मैच देख रहे।
महिलाएं भी फुटबॉल टूर्नामेंट देखने आती हैं।