Tuesday, August 10, 2021
Monday, August 9, 2021
ओपनिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर केएल राहुल ने लगाया विराम, टीम इंडिया को बड़ी राहतऍ August 09, 2021 at 05:06PM
नई दिल्ली ज्यादा वक्त नहीं बीता। बीते सप्ताह की ही बात है। केएल राहुल (KL Rahul) टेस्ट करियर दोहारे पर खड़ा था। लगातार कम स्कोर बनाने के बाद बतौर ओपनर उन्हें असफल माना जाने लगा था। और कर्नाटक के इस बल्लेबाज को उम्मीद थी कि उन्हें टेस्ट टीम के मिडल-ऑर्डर में चुन लिया जाएगा। और फिर किस्मत अपना रंग दिखाती है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के नॉटिंगम में पहले टेस्ट से मयंक अग्रवाल से सिर पर चोट लग जाती है। और एक बार फिर राहुल के लिए टीम के दरवाजे खुलते हैं। इस बार फिर बतौर ओपनर। इंग्लैंड के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ, एक ऐसी पिच पर जो तेज और स्विंग गेंदबाजी के लिए मददगार मानी जाती है, राहुल अपने नैसर्गिक खेल से अलग संयम से बल्लेबाजी करते हैं। वह 214 गेंदों का सामना कर 84 रन की पारी खेलते हैं। दूसरी पारी में जेम्स एंडरसन और इंग्लैंड के बाकी गेंदबाज गेंद को काफी घुमा रहे थे और ऐसे में राहुल 26 रन बनाते हैं। क्रिकेट के पंडित पहले टेस्ट में राहुल के प्रदर्शन से काफी खुश नजर आ रहे हैं। राहुल ने पांचवां दिन धुलने के बाद कहा था, 'पिछली बार जब मैं इंग्लैंड आया था, मैंने बहुत ज्यादा रन नहीं बनाए थे। लेकिन मैंने उस सीरीज से काफी कुछ सीखा और इस बार अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद के साथ आया।' साल 2018 की सीरीज में राहुल बहुत खराब फॉर्म में थे। वह अकसर ऑफ स्टंप के बाहर की गेंद पर छेड़खानी करते हुए आउट हो जाते थे। लेकिन पहले टेस्ट में ऐसा नहीं नजर आया। 2018 में वह बाहर जाती गेंद को लेकर इतना परेशान थे कि जो गेंद टप्पा खाने के बाद अचानक अंदर आती थी, वह उनके लिए चिंता का सबब बन जाती। ऐसा लगता है कि इस बीच उन्होंने अपनी बल्लेबाजी पर काफी काम किया है। राहुल के लिए साल 2018 का साल इतना खराब रहा था कि अगले दो साल उन्हें दल में होने के बावजूद भारत के लिए टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला। राहुल ने कहा कि खेलने का अवसर नहीं मिलने पर वह निराश थे लेकिन साथ ही उन्हें इस दौरान अपने खेल पर काम करने का भी अवसर मिला। राहुल ने कहा, 'मैं टीम के साथ था लेकिन हमेशा बाहर बैठा रहता था। मैं टीम का हिस्सा होकर खुश था लेकिन साथ ही मौके नहीं मिलने से निराशा भी थी। और जब मौका मिला तो मैंने सिर्फ अपनी ओर से योगदान देने की कोशिश की।' नॉटिंगम में राहुल ने ऑफ-स्टंप के बाहर की गेंदों को लगातार छोड़ा। यहां तक कि अगर वह ऐसी गेंदों को खेलने की कोशिश कर भी रहे थे तो गेंद की लाइन के अंदर से खेल रहे थे। बल्ला उनके शरीर के काफी करीब था। इसका फायदा यह था कि अगर कोई गेंद कुछ ज्यादा ही मूवमेंट करती तो वह बैट को मिस कर गई। इस वजह से पहली पारी में वह ऑफ स्टंप के बाहर कई बार चूके तो सही लेकिन गेंद ने उनके बल्ले का किनारा नहीं लिया। 29 वर्षीय इस बल्लेबाज को इसकी बिलकुल परवाह नहीं है कि कुछ दिन पहले तक ओपनर के रूप में उनके नाम पर विचार भी नहीं किया जा रहा था। अगर मयंक अग्रवाल के चोट नहीं लगती तो राहुल मिडल-ऑर्डर में किसी के असफल होने का इंतजार कर रहे होते। उन्होंने कहा, 'मुझे लगातार अपनी भूमिका बदलनी पड़ती है। इस बात से मुझे अब ज्यादा परेशानी नहीं होती। मुझे इस बात से काफी आत्मविश्वास मिलता है कि टीम को लगता है कि मैं बतौर सलामी बल्लेबाज भी अपना योगदान दे सकता हूं और मिडल-ऑर्डर में भी।'
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