Friday, April 2, 2021

धोनी फिनिशेज ऑफ इन स्‍टाइल... कानों में रवि शास्‍त्री के ये शब्‍द गूंजने पर आज भी खड़े हो जाते हैं रोंगटे April 01, 2021 at 11:35PM

नई दिल्‍ली 2 अप्रैल, 2011... ये तारीख हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के लिए बेहद खास है। दस साल पहले, इसी दिन मुंबई के वानखेड़े स्‍टेडियम में श्रीलंका को हराकर भारत ने विश्‍व कप जीता था। तब 28 साल के रहे महेंद्र सिंह धोनी ने 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर छक्‍का लगाकर इतिहास रच दिया था। उस वक्‍त टीवी पर आवाज गूंज रही थी रवि शास्‍त्री की। वही शास्‍त्री जो इस समय टीम इंडिया के कोच हैं। शास्‍त्री की वो कमेंट्री आज भी फैन्स को सुनाई दे जाती है तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जीत की सालगिरह पर फैन्‍स को याद आए शास्‍त्रीक्रिकेट प्रेमियों के लिए आज का दिन किसी त्‍योहार से कम नहीं। सोशल मीडिया पर #WorldCup2011, गौतम गंभीर, धोनी और रवि शास्‍त्री ट्रेंड कर रहे हैं। धोनी के उस शानदार छक्‍के और शास्‍त्री की ऐतिहासिक कमेंट्री को याद करते हुए फैन्‍स भावुक हो जा रहे हैं। शास्‍त्री ने इस खास मौके पर ट्वीट करते हुए लिखा कि 'ये एक ऐसा दिन है जो हर भारतीय क्रिकेट प्रेमी के जेहन में छपा है। शानदार काम किया था दोस्‍तों!' एक यूजर ने लिखा है, 'एक दशक गुजर गया है लेकिन मैं आज भी रवि शास्‍त्री की कमेंट्री और वंदे मातरम को सुन सकता हूं। मैं सिर्फ 10 साल का था।' एक अन्‍य ने लिखा कि 'रवि शास्‍त्री को 2011 वर्ल्‍ड कप के दौरान शानदार कमेंट्री के लिए मैन ऑफ द सीरीज मिलना चाहिए था। उन्‍होंने खेल को इतना मनोरंजक बनाया कि आज भी मेरे दिमाग में उनके शब्‍द घूमते हैं।' कई फैन्‍स ने रवि शास्‍त्री से गुजारिश करते हुए ट्वीट क‍िया वे कमेंट्री में लौट आएं। अब ये फैसला तो शास्‍त्री को करना है मगर बतौर कोच भी उनका वही अंदाज देखने को मिल रहा है। उनकी कोचिंग के दौरान भारत ने ऑस्‍ट्रेलिया को दो बार उसी के घर में हराया। घरेलू मैदानों पर तो टीम इंडिया को हरा पाना वैसे ही बेहद मुश्किल है। शास्‍त्री ने आखिरी गेंद पर क्‍या कहा था? भारतीय क्रिकेट के ऐतिहासिक पलों के गवाह रहे हैं रवि शास्‍त्रीसिर्फ 2011 वर्ल्‍ड कप ही नहीं, रवि शास्‍त्री ने अपनी आंखों से भारत को अलग-अलग मैदानों पर इतिहास बनाते देखा है। वह 1983 की उस टीम के सदस्‍य थे जिसने भारत को पहली बार विश्‍व कप जिताया था। क्रिकेट से रिटायर होने के बाद शास्‍त्री ने कमेंट्री शुरू की। साल 2007 के टी-20 वर्ल्‍ड कप में जब युवराज सिंह ने इंग्‍लैंड के स्‍टुअर्ट ब्रॉड के एक ओवर में छह छक्‍के लगाए थे, तब कमेंट्री बॉक्‍स में शास्‍त्री ही थे। दिलचस्‍प ये कि खुद शास्‍त्री भी घरेलू क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्‍के लगा चुके हैं। भारत ने जब 2007 विश्‍व कप जीता तब भी फैन्‍स को रवि शास्‍त्री की आवाज ही सुनाई दी। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्‍वालियर में खेला गया वो क्रिकेट मैच भला कौन भूल सकता है। सचिन तेंदुलकर उस मैच में वनडे क्रिकेट में 200 रन बनाने वाले पहले बल्‍लेबाज बने थे। संयोग ही था कि उस वक्‍त भी रवि शास्‍त्री ही कमेंट्री कर रहे थे। उनके शब्‍द "First man on the planet to reach 200, and it’s the Superman from India!" आज भी हर क्रिकेट प्रेमी के जेहन में ताजा हैं।

धोनी का वह एक साहसिक फैसला, जिसने 28 साल बाद भारत की झोली में डाल दिया था वर्ल्ड कप April 01, 2021 at 10:45PM

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम को दूसरी बार वर्ल्ड कप जीते हुए आज 10 साल हो गए। टीम इंडिया ने महेंद्र सिंह धोनी (Mahender Singh Dhoni) की कप्तानी में 2 अप्रैल 2011 को मुंबई में श्रीलंका केा हराकर वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया था। भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 6 विकेट से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। पढ़ें : टीम इंडिया के उस समय स्ट्रैंथ और कंडीशनिंग कोच रहे पैडी अप्टन (Paddy Upton) ने टाइम्स ऑफ इंडिया डॉट कॉम से बातचीत में कहा कि वर्ल्ड कप जीतने की तैयारी 3 साल पहले से हो रही थी। भारत ने कोच गैरी कर्स्टन (Gary Kirsten) की देखरेख में इस खास उपलब्धि को हासिल की थी जिन्हें साल 2008 में टीम इंडिया का कोच बनाया गया था। '3 साल पहले शुरू कर दी थी वर्ल्ड कप जीतने की प्लानिंग' वर्ल्ड कप जीत की याद को ताजा करते हुए कर्स्टन ने कहा, 'उसकी सबसे बड़ी बात ये थी कि हमने 3 साल पहले प्लानिंग शुरू कर दी थी। हमारा सपना 2008 में शुरू हुआ था। जब हमने भारतीय टीम के साथ काम करना शुरू किया था तो हमें 28 साल बाद पहली बार 2011 में वर्ल्ड कप जीतना था। यह तीन साल की प्लानिंग थी। एशिया कप फाइनल से पहले कोच गैरी कर्स्टन, बोलिंग कोच एरिक सिमंस और मैं यही सोच रहे थे कि यदि यह वर्ल्ड कप का फाइनल होता तो क्या हम जीत सकते थे। जवाब था संभवत: नहीं। हमने इस बारे में लगभग 5 घंटे बातचीत की। हमने उन चीजों पर बात की कि वे क्या चीजें हैं जो इस टीम को फाइनल में जीतने के लिए हमें अगले 10 महीने में करने की जरूरत है। यह शारीरिक, रणनीतिक और मानिक रूप से तैयार करने के बारे में था। क्योंकि उस समय किसी भी टीम ने अपनी मेजबानी में वर्ल्ड कप नहीं जीता था।' पढ़ें : फाइनल में भारत की ओर से गौतम गंभीर ने सबसे अधिक 97 रन बनाए थे वहीं धोनी ने नााबाद 91 रन की पारी खेली। अप्टन ने उन दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें अभी भी वो भाषण याद है जब उन्होंने खिलाड़ियों से कहा था कि यह बॉलीवुड फिल्म की तरह है। अप्टन ने कहा कि धोनी का युवराज सिंह से पहले खुद को बल्लेबाजी क्रम में लाना साहसिक फैसला था। ...तब पांचवें नंबर पर उतरे थे धोनी बकौल अपटन, ' धोनी की कप्तानी की सबसे बड़ी खासियत उनका कूल रहना है। उस मैच में धोनी पांचवें नंबर पर बल्लेबाजी के लिए उतरे थे। उस समय युवराज सिंह बेहतरीन फॉर्म में थे। वह अपने बेहतरीन प्रदर्शन से मैन ऑफ द सीरीज का खिताब सुनिश्चित कर चुके थे। बावजूद इसके धोनी ने फाइनल में युवी से पहले बल्लेबाजी के लिए खुद को उतारा। इसको लेकर काफी चर्चा भी हुई थी। क्योंकि इससे पहले धोनी उम्मीद के मुताबिक रन नहीं बना सके थे जबकि युवी ने अच्छे स्कोर किए थे। लेकिन ये सिर्फ छह सप्ताह का नतीजा था। ये धोनी की ओर से बड़ा फैसला था। कर्स्टन ने भी धोनी के इस फैसले को बेझिझक हां कर दिया था। और फिर हम सबने देखा कि यह एक शानदार फैसला था।'

वर्ल्ड कप जीत के 10 साल पूरे:युवराज से पहले आकर धोनी ने बदला पूरा मैच; पैडी अप्टन बोले- गैरी कर्स्टन और माही को एक दूसरे पर काफी भरोसा था April 01, 2021 at 11:05PM

अगला वर्ल्ड कप कब जीतेंगे?:2011 की कामयाबी के बाद वनडे और टी-20 मिलाकर 5 वर्ल्ड कप में खाली हाथ रही टीम इंडिया, 4 में धोनी ही थे कप्तान April 01, 2021 at 10:33PM