Wednesday, December 23, 2020

मास्टर ब्लास्टर तेंदुलकर ने कहा- डिफेंसिव की जगह फ्रंट फुट पर खेलें, फील्डिंग भी सुधारे टीम इंडिया December 22, 2020 at 09:41PM

4 मैचों की टेस्ट सीरीज के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 8 विकेट से करारी शिकस्त दी। पहले टेस्ट में मिली हार के बाद सचिन तेंदुलकर ने कहा कि भारतीय टीम को निश्चित तौर पर अपनी फील्डिंग सुधारने की जरूरत है। उन्होंने कहा, 'कैच ही मैच जिताते हैं। यह हम सब जानते हैं। हमें कैच ड्रॉप नहीं करना चाहिए। फील्डिंग में सुधार की जरूरत है।'

सचिन ने साथ ही भारतीय बल्लेबाजों को डिफेंसिव होने की बजाय फ्रंट फुट पर खेलने की सलाह दी है। बता दें कि भारत ने पहले टेस्ट की पहली पारी में 6 कैच ड्रॉप किए थे। इसमें मार्नस लाबुशाने के 3 और टिम पेन का एक कैच शामिल था। इसके खामियाजा टीम को हार के रूप में भुगतना पड़ा।

भारतीय बल्लेबाजों के फुटवर्क में कमी दिखी

सचिन ने कहा, पहली पारी में हमने अच्छी बल्लेबाजी की। 244 रन एडिलेड के विकेट पर अच्छा टोटल था। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया को 200 रन के अंदर समेटना भी शानदार रहा। लेकिन हम दूसरी पारी में यही चीज नहीं दोहरा सके। दूसरे दिन भारत की दूसरी पारी में मयंक अग्रवाल और जसप्रीत बुमराह नाबाद पवेलियन लौटे। तीसरे दिन मुझे भारतीय बल्लेबाजों के फुटवर्क में कमी दिखी। टीम इंडिया के बल्लेबाज फ्रंट फुट की बजाय, हाफ फुट फ्रंट और हाफ फुट डिफेंस (एक पैर बाहर और एक पैर क्रीज के अंदर) में खेल रहे थे।

फ्रंट फुट पर खेलने से स्विंग को रोका जा सकता है

सचिन ने कहा, 'ऑस्ट्रेलियाई पिच पर जरूरी है कि बल्लेबाज फ्रंट फुट पर खेले। अगर आप डिफेंसिव होकर खेलेंगे, तो आप दूर से ही बॉल को हिट करना चाहेंगे और इससे बैट का किनारा लगने का डर होता है। वहीं, अगर आप फ्रंट फुट पर और हाथ और पैड के बीच के गैप को कम रखोगे, तो आप बॉल की स्विंग को रोक सकते हैं।'

खराब गेंदों पर विकेट नहीं गंवा सकते

सचिन ने कहा, 'मयंक और पृथ्वी को छोड़कर सभी खिलाड़ी प्रेशर में खेल चुके हैं। विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा और ऋद्धिमान साहा काफी समय से टीम में हैं। इन्होंने इस मैच में भी प्रेशर को काफी अच्छा हैंडल किया, लेकिन कभी-कभी आपको लक की भी जरूरत होती है।'

उन्होंने कहा, 'कई बार ऐसा होता है कि बैट्समैन स्विंग वाली बॉल नहीं खेल पाते हैं, लेकिन फिर भी वे हिम्मत नहीं हारते। भारतीय टीम में इस चीज की कमी दिखी। आप गेंदबाज को एक औसत बॉल पर विकेट नहीं दे सकते। इससे आप सामने वाली टीम पर प्रेशर नहीं डाल सकते। अच्छे गेंद का सम्मान जरूर होना चाहिए। मुझे लगता है कि एडिलेड में 275-280 रन का सही होता।'

भारत को वनडे सीरीज के बाद टेस्ट सीरीज खेलना चाहिए था

सचिन ने कहा, 'मुझे लगता है कि भारत को पहले टी-20 सीरीज खेलना चाहिए था। ऐसा इसलिए क्योंकि टीम ने फरवरी से कोई टेस्ट नहीं खेला है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टी-20 सीरीज, फिर वनडे सीरीज और आखिरी में टेस्ट सीरीज होना चाहिए था। वहीं, आखिरी वनडे पिंक बॉल से होना चाहिए था। इससे भारतीय टीम को टेस्ट फॉर्मेट में ढलने में मदद मिलती।' सचिन ने 2013 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। उन्होंने 200 टेस्ट में 53.79 की औसत से 15,921 रन बनाए।



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सचिन ने 2013 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लिया था। उन्होंने 200 टेस्ट में 53.79 की औसत से 15,921 रन बनाए। (फाइल फोटो)

Tuesday, December 22, 2020

पूर्व भारतीय स्पिनर बिशन सिंह बेदी नेDDCA की सदस्यता छोड़ी; कोटला में अपने नाम के स्टैंड को हटाने की मांग की December 22, 2020 at 08:16PM

भारत के पूर्व स्पिनर बिशन सिंह बेदी ने फिरोजशाह कोटला (अरूण जेटली स्टेडियम) में दिल्ली डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) के पूर्व अध्यक्ष अरूण जेटली की प्रतिमा लगाए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। वर्तमान क्रिकेट बॉडी ने स्टेडियम में जेटली की 6 फुट ऊंची ऊंची प्रतिमा लगाने का फैसला किया है।
जेटली का कुछ साल पहले बीमारी की वजह से देहांत हो गया था। वे बीजेपी के नेता थे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे थे। उनकी मृत्यु के बाद पिछले साल स्टेडियम नाम बदलकर उनके सम्मान में अरुण जेटली स्टेडियम कर दिया गया था। जेटली 14 साल तक DDCA के अध्यक्ष रहे थे। वे 1999 से 2013 तक अध्यक्ष थे। कुछ महीने पहले पत्रकार रजत शर्मा के DDCA के अध्यक्ष से इस्तीफा देने के बाद अरूण जेटली के बेटे रोहन जेटली को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया था।
बेदी ने अरुण जेटली के पुत्र और DDCA अध्यक्ष रोहन जेटली को पत्र लिखकर अपने नाम की स्टैंड को हटाने की मांग की है। साथ उन्होंने DDCA की सदस्यता से भी त्यागपत्र देने की घोषणा की है। साल 2017 में कोटला का एक स्टैंड का नाम बेदी के सम्मान में बिशन सिंह बेदी स्टैंड कर दिया गया था।

उन्होंने पत्र में लिखा है," मैं धैर्यवान और सहनशील व्यक्ति हूं। मुझे इस पर गर्व है। लेकिन DDCA अभी जो कुछ चल रहा है, उससे मैं डरा हूं और मैं मजबूर होकर ये कदम उठा रहा हूं। इसलिए आपसे निवेदन है कि मेरे नाम के स्टैंड को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए। और मेरा सदस्यता समाप्त कर दी जाए।"
बेदी ने आगे लिखा- मैने यह फैसला काफी सोच समझकर लिया है। मुझे ऐसा नहीं लग रहा है कि मुझे दिए गए सम्मान की अवहेलना की जा रही है। लेकिन सम्मान के साथ दायित्व भी बढ़ जाती है। मैं उनके प्रति आभारी हूं कि जिन्होंने मुझे खेलने के दौरान सम्मान दिया। जिसकी वजह से मैं खेल सका। अब मैं यह सम्मान वापस कर रहा हूं, क्योंकि मैं उन लोगों को बताना चाहता हूं कि रिटायरमेंट के चार दशक बाद भी मेरे अंदर वैल्यू बचे हुए हैं।
टेस्ट में ले चुके हैं 266 विकेट
बेदी ने इंडिया के लिए 67 टेस्ट और 10 वनडे मैच खेले हैं। 67 टेस्ट मैचों में बेदी ने 266 विकेट और 10 वनडे में 7 विकेट ले चुके हैं।



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बिशन सिंह बेदी इंडिया के लिए 67 टेस्ट मैचों में 266 विकेट ले चुके हैं।

ऑस्ट्रेलिया को झटका, डेविड वॉर्नर बॉक्सिंग डे टेस्ट से भी बाहर December 22, 2020 at 07:47PM

सिडनीऑस्ट्रेलिया के स्टार ओपनर भारत के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में नहीं खेल पाएंगे। उन्होंने चोट के उपचार के लिए बायोबबल छोड़ दिया है जो उन्हें किसी भी हाल में बॉक्सिंग डे टेस्ट में खेलने का मौका नहीं देगा। ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड में पिछले हफ्ते खेले गए सीरीज के पहले टेस्ट मैच में 8 विकेट से शानदार जीत दर्ज की थी। वॉर्नर उस मैच का भी हिस्सा नहीं थे। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 26 दिसंबर से शुरू होने वाले बॉक्सिंग डे टेस्ट के लिए उनके फिट होने की उम्मीद थी। पढ़ें, ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड में भारत की दूसरी पारी मात्र 36 रन पर समेट दी थी। वॉर्नर और एबॉट सिडनी में कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के बाद राज्य की सीमा बंद होने से पहले मेलबर्न के लिए रवाना हुए थे और अब तीसरे टेस्ट से वह टीम में शामिल हो जाएंगे। तीसरा टेस्ट मैच सिडनी क्रिकेट ग्राउंड में 7 जनवरी से होना है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने एक बयान में कहा, 'वॉर्नर को भारत के खिलाफ वनडे सीरीज में चोट लगी थी, जिससे वह पूरी तरह नहीं उबर पाए हैं। दूसरे टेस्ट के लिए वह उपलब्ध नहीं होंगे।' सीए ने बताया कि एबॉट भारत के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया ए के प्रैक्टिस मैच के दौरान चोटिल हो गए थे, जिससे वह पूरी तरह उबर चुके हैं। (एजेंसी से इनपुट)

कभी सुधारी थी विराट की तकनीक, अब राजपूत का पृथ्वी को 'ऑफर' December 22, 2020 at 07:02PM

गौरव गुप्ता, मुंबईभारतीय टीम के पूर्व ओपनर ने युवा को उनकी बल्लेबाजी तकनीक में सुधार की मदद की पेशकश की है। ऑस्ट्रेलिया के महान बल्लेबाज ग्रेग चैपल ने हाल ही में राजपूत को भारतीय कप्तान विराट कोहली को 2014 के इंग्लैंड दौरे के बाद तकनीक सुधारने में मदद का श्रेय दिया था। एडिलेड टेस्ट में ओपनिंग करते हुए पृथ्वी साव पहली पारी में तो खाता ही नहीं खोल सके जबकि दूसरी पारी में 4 रन बनाकर बोल्ड हो गए। इससे उनकी एक बड़ी तकनीकी कमजोरी भी सामने आ गई। पढ़ें, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पॉन्टिंग ने आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स फ्रैंचाइजी में उन्हें कोचिंग देते हुए शॉ की कमजोरी को देखा था। वहीं, राजपूत कहते हैं कि उन्होंने 21 वर्षीय बल्लेबाज की कमी को कुछ समय पहले ही देखा। राजपूत ने हरारे से हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, 'पृथ्वी को एक बड़ी समस्या है कि वह अपने बल्ले और पैड के बीच थोड़ा सा अंतर छोड़ देते हैं। मैं न्यूजीलैंड में भी उनके साथ यह देख सकता था। उनका बल्ला लगभग गली क्षेत्र से आगे आता है, और जब वह अपना बैट नीचे करते हैं तो वह एक अंतर बना देता है।' जिम्बाब्वे के मौजूदा नैशनल कोच राजपूत ने कहा, 'आसान तरीका यही है कि उनका बैकलिफ्ट सीधा रहना चाहिए। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी दाहिनी कोहनी पेट से छूते हुए रहे। ऐसा करने से उसका बल्ला सीधा हो जाएगा, और इस तरह वह गैप भी नहीं रहेगा। वह उस गेंद का सामना कर सकते हैं जो अंदर आती है। मुझे यकीन है कि अगर वह कुछ दिनों के लिए मेरे साथ (नेट्स में) रहते हैं, तो मैं उनकी मदद कर सकता हूं।' 2007 में भारत की टी20 विश्व कप विजेता टीम के कोच रहे राजपूत इससे पहले अफगानिस्तान और कई घरेलू टीमों को भी कोचिंग दे चुके हैं। मुंबई के पूर्व सलामी बल्लेबाज ने आश्चर्य जताया कि साव की इस कमी पर अभी तक उनके किसी कोच ने भी काम क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा, 'हर कोई कह रहा है कि वह बल्ले और पैड के बीच एक बड़ा अंतर छोड़ देता है, लेकिन कोई इस पर काम क्यों नहीं कर रहा है? वह एक अच्छे स्ट्रोक प्लेयर हैं। केवल एक चीज यह है कि जब आप अच्छे फॉर्म में होते हैं तो आप कमियों को नहीं देखते हैं। हालांकि, जब आप रन नहीं बना पा रहे होते हैं तो समस्या सामने आती है, जहां विपक्षी गेंदबाज, खासकर अगर वे थोड़े तेज होते हैं, तो आप को परेशान करते हैं।' पढ़ें, भारत के पूर्व कोच चैपल ने कोहली के 2014 के खराब दौरे के बाद उनकी प्रतिभा को जल्दी पहचानने का श्रेय राजपूत को दिया था। राजपूत ने कहा, 'विराट को इंग्लैंड में समस्या थी क्योंकि वह शुरुआत में जेम्स एंडरसन की गेंद पर बोल्ड हो गए थे। इसके बाद उन्होंने चौथे या पांचवें स्टंप पर गेंदबाजी करते हुए उन्हें परेशान किया, जहां वह केवल रन बनाने के बाद ही कैच आउट हुए। जब वह मुंबई (बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में शरद पवार इंडोर अकैडमी में) आए, तो उन्होंने मेरे साथ कुछ वक्त बिताया।' उन्होंने कहा, 'सबसे पहली और अहम बात यही थी कि वह अपने सिर को उठाकर खेलते थे, उन्हें लगता था कि गेंद उनके करीब रहेगी। हालांकि वह चौथे या पांचवें स्टंप पर गेंद खेल रहे थे। जब वह अकैडमी में आए तो उन्हें पहले सिर को स्थिर रखने की कोशिश कराई गई। जो आइडिया था, यही था कि वह गेंद की लाइन में रहें जहां गेंद पड़ रही है।'