Tuesday, August 18, 2020

आज का दिन: विराट कोहली ने किया था 12 साल पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू August 17, 2020 at 09:16PM

नई दिल्ली अगस्त की 18 तारीख थी और साल था 2008 जब भारतीय कप्तान (Virat Kohli) ने अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू () किया था। कोहली ने अपना वनडे ODI श्रीलंका के खिलाफ खेला था और उस मैच में सिर्फ 12 रन बनाए थे। दाएं हाथ के बल्लेबाज कोहली ने भारत के लिए पारी की शुरुआत की और 22 गेंदों का सामना किया। कोहली ने क्रीज पर 33 मिनट बिताए थे और एक चौका लगाया था। कोहली का विकेट नुआन कुलासेकरा ने लिया था। भारत उस मैच में सिर्फ 146 रन पर आउट हो गया था। अजंता मेंडिस और मुथैया मुरलीधरन ने तीन-तीन विकेट लिए थे। श्रीलंका ने 35वें ओवर में मैच 8 विकेट से मैच जीत लिया था। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने कोहली के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 12 साल पूरे होने पर एक वीडियो पोस्ट किया है। इस मौके पर बोर्ड ने न्यूजीलैंड के खिलाफ मोहाली में खेली गई उनकी पारी के अंश को साझा किया है। कोहली को अपनी पहली सेंचुरी के लिए 14 मैच का इंतजार करना पड़ा था और उन्होंने कोलकाता में श्रीलंका के खिलाफ 2009 में 109 रनों की पारी खेली थी। तब से कोहली वनडे इंटरनैशनल में 43 सेंचुरी लगा चुके हैं। वह सचिन तेंडुलकर के 49 वनडे सेंचुरी के रेकॉर्ड को तोड़ने के काफी करीब पहुंच गए हैं। कोहली को रनों का पीछा करने का महारथी समझा जाता है। 31 साल के कोहली ने अभी तक 248 वनडे इंटरनैशनल मुकाबले खेले हैं जिसमें उन्होंने 11867 रन बनाए हैं। उनका बल्लेबाजी औसत 59.33 का है और सर्वोच्च स्कोर पाकिस्तान के खिलाफ 183 रन है।

स्वास्थ्य जोखिम का हवाला देकर राष्ट्रीय शिविर से हटी विनेश, नाराज डब्ल्यूएफआई बोला हम कोई दुकान नहीं चला रहे हैं August 17, 2020 at 09:35PM

नई दिल्ली के लिए क्वॉलिफाइ करने वाली एकमात्र भारतीय महिला पहलवान () कोविड-19 महामारी (Covid-19 Pandemic) के बीच स्वास्थ्य चिंताओं का हवाला देकर राष्ट्रीय शिविर (National Camp for wrestlers) से हट गई हैं जिस फैसले से राष्ट्रीय महासंघ (WFI) नाराज है। ओलिंपिक वजन वर्ग के पहलवानों के लिए राष्ट्रीय शिविर एक सितंबर से लखनऊ (महिला) और सोनीपत (पुरुष) में शुरू होगा। हालांकि विनेश लखनऊ की यात्रा करने को लेकर सहज नहीं थीं क्योंकि महामारी के बीच उन्हें अपने स्वास्थ्य को लेकर डर है। विनेश ने कहा, ‘मैं शिविर में हिस्सा नहीं लेने जा रही। मैं कोच ओम प्रकाश के साथ रोजाना ट्रेनिंग कर रही हूं जो उस योजना का पालन करते हैं जो मेरे निजी कोच वूलर एकोस हर हफ्ते मुझे भेजते हैं। लखनऊ की यात्रा करने के लिए स्थिति ठीक नहीं है।’ विश्व चैंपियनशिप 2019 की कांस्य पदक विजेता ने कहा कि वह काफी आसानी से बीमार हो जाती हैं इसलिए वह अपने स्वास्थ्य को लेकर कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। उन्होंने कहा, ‘मेरा पेट काफी संवेदनशील है। आप लखनऊ में भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) केंद्र से बाहर नहीं निकल सकते इसलिए आप अपने लिए जरूरत की चीजें नहीं ला सकते। लखनऊ में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं लेकिन यहां हरियाणा में स्थिति सुरक्षित है इसलिए मैं यहां अधिक सहज हूं।’ भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) हालांकि एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता के कारणों से प्रभावित नहीं है। डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर ने कहा, ‘चयन समिति फैसला करेगी कि विनेश को छूट मिलेगी या नहीं। शिविर खिलाड़ियों के लिए है। हम चाहते हैं कि अब ओलिंपिक के लिए तैयारी शुरू हो जाए।’ उन्होंने कहा, ‘हम अपने फायदे के लिए दुकान नहीं चला रहे हैं, शिविर खिलाड़ियों के लिए है और जब वे इस तरह का अंदेशा जताते हैं तो यह हैरानी भरा होता है।’ सुशील कुमार को राष्ट्रीय शिविर में हिस्सा लेने की जगह छत्रसाल स्टेडियम रहने और ट्रेनिंग की छूट पर तोमर ने कहा कि उनका मामला अलग है। उन्होंने कहा, ‘हमें पता है कि छत्रसाल बड़ी सुविधा है। वहां जिम है, मैट है और सुशील की ट्रेनिंग के लिए पर्याप्त जोड़ीदार हैं। हमें नहीं पता कि विनेश कौन से अखाड़े में ट्रेनिंग कर रही है, वहां किस तरह की सुविधाएं हैं।’ तोमर ने कहा, ‘साइ टाप्स के जरिए इन खिलाड़ियों का समर्थन करता है और कई विदेशी दौरों पर भेजता है। उन्हें इस बारे में सोचना चाहिए।’ महिला शिविर 50, 53, 57, 62 और 68 किग्रा में शुरू होगा लेकिन डब्ल्यूएफआई 76 किग्रा वर्ग की पहलवान को भी ला सकता है जो एक अन्य ओलिंपिक वजन वर्ग है। पुरुष फ्रीस्टाइल शिविर सभी छह ओलिंपिक वजन वर्गों के साथ शुरू होगा जिसमें 65 किग्रा वर्ग भी शामिल है जहां पदक के दावेदार बजरंग पूनिया प्रतिस्पर्धा पेश करते हैं। तोमर ने कहा, ‘बजरंग अपने निजी कोच शाको बेनटिनिदिस के साथ सोनीपत में शिविर में होंगे। सिर्फ सुशील को छूट मिली है।’ बजरंग बेनटिनिदिस के साथ बेंगलुरू के इंस्पायर इंस्टीट्यूट फोर स्पोर्ट्स में ट्रेनिंग कर रहे हैं। सुशील के 74 किग्रा वर्ग में चुनौती पेश करने वाले जितेंदर कुमार भी वहीं ट्रेनिंग कर रहे हैं। भारत ने पुरुष वर्ग में बजरंग (65 किग्रा), रवि दाहिया (57 किग्रा) और दीपक (86 किग्रा) के जरिए ओलिंपिक कोटा हासिल किया है। चार साल के डोपिंग प्रतिबंध के बाद नरसिंह यादव की वापसी से 74 किग्रा वर्ग और अधिक प्रतिस्पर्धी हो गया है।

जब दंगाइयों से लड़े चौहान, बचाई साथी क्रिकेटर्स की जान August 17, 2020 at 08:06PM

प्रत्युष राज, चंडीगढ़ चाहे टूटे हुए जबड़े के साथ रणजी ट्रोफी में लगातार दो शतक लगाने की बात हो या फिर ऑस्ट्रेलिया में टूटे हुए अंगूठे के साथ तेज रफ्तार डेनिस लिली और जैफ थॉमसन का सामना करना हो, ने दिखाया था कि वह दिलेर क्रिकेटर हैं। लेकिन रविवार को कोविड-19 के चलते हुई परेशानियों से अपनी जान गंवाने वाल चेतन सिर्फ मैदान ही नहीं बल्कि बाहर भी सही मायनों में लड़ाके थे। उत्तर क्षेत्र के पूर्व क्रिकेटरों ने याद किया कि कैसे 31 अक्टूबर 1984 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में हुए सिख विरोधी दंगों में चौहान ने और राजिंदर घई को बचाया था। यह घटना झेलम एक्सप्रेस में हुई थी जब खिलाड़ी उत्तर क्षेत्र और पश्चिम क्षेत्र के बीच हुए दिलीप ट्रोफी के सेमीफाइनल के बाद पुणे से लौट रहे थे। इस घटना को याद करते हुए हरियाणा के पूर्व ऑफ-स्पिनर सरकार तलवार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'मैच 30 अक्टूबर को समाप्त हुआ। अगली सुबह जब हम एयरपोर्ट के लिए तैयार हो रहे थे तब हमें खबर मिली कि प्रधानमंत्री की हत्या कर दी गई है। तो हमारे टीम मैनेजर प्रेम भाटिया ने हमें झेलम एक्सप्रेस के फर्स्ट क्लास के टिकट लाकर दिए। यह एक बहुत बुरा सफर था। हमें दिल्ली पहुंचने में चार दिन का वक्त लगा।' तलवार ने आगे बताया, 'एक स्टेशन पर करीब 40-50 लोग हमारे डिब्बे में चढ़े। वे सिख समुदाय के लोगों को ढूंढ रहे थे। हमारी टीम में तीन सिख खिलाड़ी- नवजोत सिंह सिद्धू, राजिंदर घई और योगराज सिंह थे। मुझे अच्छी तरह याद है कि चेतन चौहान और ने भीड़ से काफी बहस की। यह बहस बहुत गरम हो गई थी। जब भीड़ को पता चला कि वे भारतीय क्रिकेटर हैं तो वे डिब्बे से उतर गए।' खिलाड़ी इतना डर गए थे कि उन्होंने सिद्धू और घई को लोअर बर्थ के नीचे, किट बैग के पीछे छुपा दिया था। पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह ने तो सिद्धू को अपने केश काटने तक को कहा था। पूर्व ऑलराउंडर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह याद करते हैं, 'यह बहुत डरावना था। वे ट्रेनें जला रहे थे और चेतन चौहान और यशपाल शर्मा से उनकी बहस के बाद मैंने सिद्धू से कहा था कि वह केश काट ले। उसने मना कर दिया और कहा, 'पाजी मैं सरदार पैदा हुआ हूं और सरदार ही मरूंगा।'' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे याद है कि भीड़ ने चेतन चौहान से चिल्लाते हुए कहा, 'हम यहां सरदारों को मारने आए हैं, तुम्हें कुछ नहीं होगा।' चेतन ने जवाब दिया, 'वे मेरे भाई हैं और तुम उन्हें छू भी नही सकते।' जिस तरह चेतन ने मामले को संभाला वह वाकई काबिले तारीफ था।' गुरशरण सिंह उस समय दूसरे डिब्बे में थे। उन्होंने कहा, 'अगर चेतन चौहान नहीं होते तो मुझे नही लगता कि हममें से कोई जिंदा होता। मैं और राजिंदर हंस (उत्तर प्रदेश के पूर्व बाएं हाथ के स्पिनर) दूसरे डिब्बे में थे और जब हमें घटना के बारे में पता चला हम काफी डर गए। लेकिन चेतन चौहान हमारे पास आए और हमें आश्वासन दिया कि हम सुरक्षित हैं और भीड़ हमें कुछ नही कहेगी।'

पाकिस्तान क्रिकेट जगत ने महेंद्र सिंह धोनी की तारीफों के पुल बांधे August 17, 2020 at 07:55PM

कराची के क्रिकेट समुदाय ने एक सुर में () की तारीफ करते हुए उन्हें भारत के महानतम कप्तानों (Dhoni best Captain) में से एक और खेल को अपने तरीके से प्रभावित करने वाला खिलाड़ी बताया। शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास (Dhoni Retire) की घोषणा करने वाले धोनी की कप्तानी में भारत ने टी20 विश्व कप, 50 ओवर का विश्व कप और चैंपियन्स ट्रॉफी का खिताब जीता जबकि टेस्ट क्रिकेट में दुनिया की नंबर एक टीम भी बना। इंजमाम-उल-हक, बासित अली, वसीम अकरम, वकार यूनिस, मुदस्सर नजर, और कई अन्य ने धोनी की सराहना की। पाकिस्तान के लिए सबसे अधिक मैच खेलने वाले क्रिकेटर इंजमाम ने कहा, ‘मेरी नजर में वह भारत के महानतम क्रिकेट कप्तानों में से एक है। असली मैच विजेता जिसके खिलाफ खेलने का मैंने काफी लुत्फ उठाया।’ राशिद लतीफ का मानना है कि भारतीय क्रिकेट में धोनी की विरासत (MS Dhoni Legecy) को हमेशा याद रखा जाएगा लेकिन उसके संन्यास का मतलब है कि विराट कोहली अब अपनी विरासत तैयार कर सकता है। राशिद ने कहा, ‘शानदार खिलाड़ी और कप्तान। उसमें खेल को सटीकता के साथ पढ़ने की क्षमता थी और प्रत्येक स्थिति के अनुसार अपने खिलाड़ियों का इस्तेमाल करता था और वह परफेक्ट फिनिशर था।’ पूर्व टेस्ट सलामी बल्लेबाज मुदस्सर ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि धोनी खेल के सर्वश्रेष्ठ फिनिशर में से एक हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने पहली बार उसे तब देखा जब मैं कीनिया को कोचिंग दे रहा था। नैरोबी में त्रिकोणीय टूर्नामेंट था और धोनी ने लगातार दो शतक लगाए। लेकिन तब मुझे नहीं पता था कि वह भारतीय क्रिकेट और विश्व क्रिकेट पर इतना बड़ा असर छोड़ेगा।’ शीर्ष बल्लेबाज ने कहा कि कप्तान और विकेटकीपर के रूप में रन बनाने की धोनी की क्षमता शानदार थी। उन्होंने कहा, ‘उसने अलग अलग स्थानों पर बल्लेबाजी की और हमेशा नतीजा दिया। मुझे 2011 विश्व कप के फाइनल में उसकी पारी याद है। यह मास्टर स्ट्रोक थी जिस तरह वह बल्लेबाजी क्रम में खुद को ऊपर लाए और विजयी छक्का जड़ा।’ बासित अली ने कहा कि उन्होंने अपने करियर में कभी धोनी से अधिक विविधता वाला खिलाड़ी नहीं देखा। उन्होंने कहा, ‘भारत और चेन्नै सुपरकिंग्स के लिए उनका रेकॉर्ड देखिए, यह शानदार है। जब वह 2016 और 2017 में पुणे के लिए खेला तो उनकी टीम ने आईपीएल फाइनल में जगह बनाई। किसी भी टीम पर उसका प्रभाव इस तरह का था।’ पूर्व टेस्ट सलामी बल्लेबाज और मुख्य चयनकर्ता मोहसिन खान ने कहा कि धोनी का सबसे बड़ा योगदान यह रहा कि उन्होंने ऐसी टीमों की कप्तानी की जिसमें शीर्ष सीनियर खिलाड़ी मौजूद थे और साथ ही युवा खिलाड़ियों को निखारा और प्रोत्साहित किया। पूर्व कप्तान और विकेटकीपर मोइन खान ने कहा, ‘निजी तौर पर मुझे वह काफी रोमांचक और स्तरीय खिलाड़ी लगा जो प्रभाव छोड़ने वाले खिलाड़ी की परिभाषा में फिट बैठता है।’ आक्रामक ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी ने भी ट्वीट करके धोनी की तारीफ की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। अफरीदी ने लिखा, ‘खेल के महान खिलाड़ियों में से एक और महानतम कप्तानों में से एक।’