Saturday, July 18, 2020

संन्यास के बाद कपिल देव की सलाह काम आई: राहुल द्रविड़ July 17, 2020 at 09:29PM

नई दिल्ली पूर्व भारतीय कप्तान () ने कहा कि महान ऑलराउंडर कपिल देव की सलाह ने उन्हें संन्यास के बाद विकल्प तलाशने में मदद की। कपिल की सलाह के के बाद उन्होंने भारत A और अंडर-19 टीमों के कोचिंग पद की जिम्मेदारी संभाली। द्रविड़ ने कहा कि वह थोड़े भाग्यशाली भी रहे कि अपने करियर के अंत में वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की टीम राजस्थान रायल्स (RR) में कप्तान-सह-कोच की भूमिका निभा रहे थे। द्रविड़ ने भारतीय महिला टीम के कोच डब्ल्यूवी रमन (WV Raman) को उनके यूट्यूब चैनल 'इनसाइड आउट' में कहा, 'खेलना बंद करने के बाद (संन्यास लेने के बाद) बहुत ही कम विकल्प थे और मुझे पता नहीं चल रहा था कि क्या करना चाहिए। तो कपिल देव ही थे जिन्होंने मुझे सलाह दी और ऐसा मेरे करियर के अंत के दौरान ही हुआ था।' उन्होंने कहा, 'मैं उनसे कहीं मिला और उन्होंने कहा, राहुल सीधे जाकर कुछ भी मत करो, पहले कुछ समय सिर्फ देखो और अलग अलग चीजें करो और फिर देखो कि तुम्हें वास्तव में क्या पसंद है। मुझे लगा कि यह अच्छी सलाह है।' इस महान क्रिकेटर ने कहा कि शुरू में उन्हें कॉमेंटरी करना पसंद आया था, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि वह खेल से थोड़े दूर हैं। द्रविड़ ने कहा, 'मुझे जो चीज सबसे ज्यादा संतोषजनक लगती है वो खेल से जुड़े रहना है और खिलाड़ियों के साथ संपर्क में रहना थी। मुझे कोचिंग जैसी चीज बहुत पसंद थी और जब मेरे पास मौका आया तो मैं भारत ए और अंडर-19 टीमों के साथ जुड़ गया।' उन्होंने कहा, 'मुझे लगा यह शुरुआत करने के लिए अच्छी जगह थी और मैंने इसे स्वीकार कर लिया और मैंने अब तक इसका काफी लुत्फ उठाया है। मुझे कोचिंग करना काफी ज्यादा संतोषजनक लगता है।' भारत के लिए 1996 से 2012 के बीच 164 टेस्ट में 13,288 रन बनाने वाले इस महान बल्लेबाज ने कहा, 'विशेषकर कोचिंग का विकास करने में मदद करने वाला हिस्सा, भले ही इसमें भारत A टीम हो, अंडर-19 टीम या फिर एनसीए (राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी)। इससे मुझे काफी सारे खिलाड़ियों से काम करने का मौका मिला और इसमें मुझे तुरंत नतीजे की चिंता भी नहीं थी जो मुझे लगता है कि मेरे लिए काम करने के लिये अच्छा था।' उन्होंने साथ ही बीसीसीआई के अंडर-19 खिलाड़ियों को एक वर्ल्ड कप तक सीमित करने के फैसले का समर्थन किया। द्रविड़ बेंगलुरु में एनसीए के भी क्रिकेट प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, 'महज 15 से 20 खिलाड़ियों के बजाए हम एनसीए में 45 से 50 खिलाड़ियों को सुविधाओं का फायदा दिला सकते थे, जिसमें अच्छे कोच, अच्छे फिजियो, अच्छे ट्रेनर शामिल थे।'

वकार ने 23 साल बाद खुलासा किया- फैंस ने अजहरुद्दीन की पत्नी पर कमेंट किया था, इसलिए इंजमाम ने उसे पीटा था July 17, 2020 at 08:58PM

भारत और पाकिस्तान के बीच 1997 में खेले गए सहारा कप के दूसरे मैच में इंजमाम उल हक ने भीड़ में घुसकर एक भारतीय फैंस की पिटाई कर दी थी। बताया जाता है कि फैंस इंजमाम को ‘आलू’ कहकर चिढ़ा रहे थे। हालांकि, मैच के 23 साल बाद अब पाकिस्तान के ही पूर्व क्रिकेटर वकार यूनिस ने उस वाकये का खुलासा किया है।

वकार ने कहा कि इंजमाम आलू कहने पर नहीं चिढ़े थे, बल्कि फैंस भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन की पत्नी पर कमेंट कर रहे थे। इस कारण इंजमाम को गुस्सा आ गया था और पिटाई के बाद भी बैट लेकर मारने के लिए दौड़ पड़े थे।

भारत ने यह मैच 7 विकेट से जीता था
सितंबर 1997 में भारत-पाकिस्तान के बीच सहारा कप सीरीज के तहत 5 वनडे खेले गए थे। कनाडा में खेली गई सीरीज के दूसरे मैच में यह वाकया हुआ था। यह मैच भारत ने 7 विकेट से जीता था। इस सीरीज में सचिन तेंदुलकर टीम इंडिया के कप्तान थे, जबकि पाकिस्तान की कमान रमीज राजा के पास थी।

फैंस का गलत कमेंट इंजमाम को पसंद नहीं आया
वकार ने एक पॉडकास्ट शो पर कहा, ‘‘दर्शकों में उसको (इंजमाम) आलू कहकर बुला रहे थे, लेकिन भीड़ में एक व्यक्ति ऐसा था जो अजहर की पत्नी को लेकर गलत कमेंट कर रहा था। इंजी तो फिर इंजी ही था। उसे यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। मैं पहले भी यह बता चुका हूं कि दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच मैदान के बाहर बेहतरीन दोस्ती रहती थी। सभी एक दूसरे का काफी सम्मान करते थे।’’

इंजमाम ने अपनी फील्ड पोजिशन बदलवाई थी
वकार ने कहा, ‘‘फैंस ने जब अजहर की पत्नी पर कमेंट किया था, तब इंजमाम ने कप्तान से कहकर अपनी फील्ड पोजिशन बदलवाई थी और 12वें खिलाड़ी से बैट भी मंगवाया। सही मायने में मुझे भी ठीक से कुछ पता नहीं है, लेकिन वह बैट लेकर उस व्यक्ति की ओर दौड़ पड़ा और भीड़ में घुसकर उसे नीचे मैदान के पास तक ले आया था।’’

इंजमाम को दो वनडे का बैन झेलना पड़ा था
वकार ने कहा, ‘‘उस घटना के लिए इंजमाम को सजा भी मिली थी। उसने माफी मांगी और कोर्ट भी गए थे। अजहर ने फैंस से बात की और कोर्ट के बाहर ही सब सेटल कर लिया था। यह सब गलत था, लेकिन मेरे बताने का मकसद है कि दोनों टीमों के खिलाड़ी एक दूसरे के लिए हमेशा खड़े रहते थे।’’इंजमाम पर उस घटना के लिएदो वनडे का बैन लग गया था।



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फैंस की पिटाई के बात इंजमाम उल हक पर दो वनडे का बैन लग गया था। इंजमाम ने माफी मांगी और कोर्ट भी गए थे।

वनडे से बाहर हुआ तो बुरा महसूस होता था: राहुल द्रविड़ July 17, 2020 at 08:47PM

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट में भरोसे का दूसरा नाम () को ही माना जाता था। वनडे क्रिकेट हो या टेस्ट अपने दौर में वह राहुल द्रविड़ ही थे जो संकट में फंसी भारतीय टीम के संकटमोचक बनते थे। लेकिन राहुल द्रविड़ भी कभी खुद को क्रिकेट में असुरक्षित महसूस करते थे। हाल ही में राहुल द्रविड़ भारतीय महिला टीम के कोच और पूर्व क्रिकेटर WV रमन के यूट्यूब चैनल 'इनसाइड आउट' पर मुखातिब हुए तो इस दौरान इस महान बल्लेबाज ने अपने करियर के चैलेंजिंग दौर पर भी बात की। इस कार्यक्रम में द्रविड़ ने बताया कि 1998 में उन्हें वनडे क्रिकेट से बाहर कर दिया गया था। द्रविड़ का वनडे फॉर्मेट में भी स्ट्राइक रेट धीमा था। इस कारण उन्हें टीम से बाहर किया गया। उन्होंने कहा, 'मेरे इंटरनैशनल करियर में ऐसे भी कई मुकाम आए, जब मैं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा था। 1998 में मुझे वनडे क्रिकेट से बाहर कर दिया गया था। मुझे अपनी वापसी के लिए संघर्ष करना पड़ा था। मैं तब एक साल तक भारतीय क्रिकेट से बाहर रहा था। तब निश्चितरूप के मेरे भीतर असुरक्षा की भावना आई थी। मैं सोचता था कि क्या वाकई मैं वनडे क्रिकेट खेलने लायक हूं भी या नहीं।' इस पूर्व बल्लेबाज ने कहा, 'मैं एक टेस्ट खिलाड़ी ही बनना चाहता था। मेरी कोचिंग टेस्ट खिलाड़ी वाली होती थी। तब हमें यही सिखाया जाता था कि गेंद पर ग्राउंड शॉट ही मारना है, उसे हवा में नहीं मारना। तब आपको चिंता होती है कि क्या आप इस फॉर्मेट (वनडे) में भी खुद को साबित कर पाएंगे।' इस पूर्व कप्तान ने कहा, 'जब हम युवा उम्र में क्रिकेट खेल रहे थे तब इस फील्ड में कॉम्पिटीशन भी बहुत था। तब भी असुरक्षा की भावना घर कर रही थी। क्योंकि भारत में एक युवा क्रिकेटर बनना आसान नहीं था। तब हमारे जमाने में सिर्फ रणजी ट्रोफी होती थी और भारतीय टीम थी।' 24000 से ज्यादा इंटरनैशनल रन बनाने वाले इस बल्लेबाज ने कहा, 'तब आईपीएल नहीं था और रणजी ट्रोफी में भी जो पैसा मिलता था वह बहुत कम ही होता था। चुनौतियां भी कड़ी हुआ करती थीं और क्रिकेट चुनने के बाद बड़े स्तर पर पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। मैं पढ़ाई में भी बुरा नहीं था। और मैं पढ़ाई में एमबीए या कुछ और आराम से कर सकता था। लेकिन मैं क्रिकेट में आगे बढ़ा और अगर यहां कामयाब नहीं हो पाता तो फिर कुछ और करने के लिए नहीं बचता। तो तब भी एक असुरक्षा की भावना होती थी।' बता दें 1998 के बाद जब द्रविड़ ने वनडे फॉर्मेट में फिर से वापसी की थी, तो उन्होंने अपनी जगह भारतीय टीम में एक भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में पक्की कर ली थी। 1999 वर्ल्ड कप में द्रविड़ भारत के सफल बल्लेबाजों में से एक थे। वह दोनों ही फॉर्मेट में जमकर खेले और उनकी साहसिक पारियों की बदौलत उन्हें भारतीय क्रिकेट में मिस्टर डिपेंडेबल या 'भारत की दीवार' (द वॉल)' के रूप में पहचान मिली।

Friday, July 17, 2020

फैन पर 'आलू' कहने पर नहीं भड़के थे इंजी: वकार July 17, 2020 at 07:40PM

नई दिल्ली भारत पाकिस्तान के एक मैच में () एक फैन पर इसलिए भड़क गए थे क्योंकि फैन्स उन्हें आलू-आलू कहकर चिढ़ा रहे थे। अगर अब तक आप भी यही मानते थे कि इंजमाम आलू कहने की वजह से भड़के थे तो आप शायद गलत हैं। पूर्व पाकिस्तानी कप्तान () ने बताया है कि इंजमाम आलू कहने की वजह से नहीं भड़के थे बल्कि वह उस फैन पर इसलिए भड़के थे क्योंकि वह भारतीय कप्तान की पत्नी को लेकर अश्लील कॉमेंट कर रहा था। उन दिनों मोहम्मद अजहरूद्दीन टीम इंडिया के कप्तान थे। वकार यूनिस ने उस लम्हे के बारे में बात करते हुए बताया, 'हां यह सही कि कुछ लोग उन्हें आलू-आलू कहकर बुला रहे थे। लेकिन उस भीड़ में एक व्यक्ति था जो अजहरूद्दीन की पत्नी पर अश्लील कॉमेंट्स कर रहा था। मेरे ख्याल से वह फैन काफी बकवास बोल रहा था और फिर इंजमाम तो इंजमाम हैं, उन्हें यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई थी।' वकार ने कहा, 'जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूं कि उन दिनों भारत-पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच मैदान से बाहर अच्छी दोस्ती होती थी। इसी वजह से इंजी फैन्स से लड़ने पहुंच गए थे।' पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वकार यूनिस एक पोडकास्ट कार्यक्रम में इस प्रकरण पर बात कर रहे थे। बता दें भारत और पाकिस्तान के बीच यह मैच टोरंटो में साल 1997 में खेला जा रहा था। इस दौरान एक भारतीय फैन इंजमाम उल हक पर फब्तियां कस रहा था, जिससे इंंजमाम भड़क गए थे। वकार ने बताया, 'इस दौरान पाकिस्तानी टीम फील्डिंग पर थी और जब वह फैन फब्तियां कस रहा था तो इंजमाम ने कैप्टन को बोलकर अपनी फील्ड पोजिशन चेंज कराई और फिर टीम के 12वें खिलाड़ी से बैट बाहर मंगवाया। फिर इंजी बैट लेकर उस फैन की ओर दौड़ पड़े और उसे स्टैंड से खींचते हुए बाहर ले आए। इसके बाद मोहम्मद अजहरूद्दीन को मैदान पर आकर इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था।' बाद में इंजमाम उल हक पर इसके लिए दो मैच का बैन लगाया गया था। यूनिस ने कहा कि इंजी को इसके लिए सजा झेलनी पड़ी थी। वकार ने बताया, उन्होंने (इंजमाम) इस प्रकरण पर माफी भी मांगी थी। वह कोर्ट भी गए थे। बाद में यह मामला कोर्ट के बाहर सेटल हो गया। जो हुआ वह गलत था। लेकिन मैं आपको बता रहा हूं कि कैसे दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे के लिए खड़े रहते थे।