Monday, June 15, 2020

रीयाल मैड्रिड ने जीत से मनाया वापसी का जश्न June 14, 2020 at 06:35PM

मैड्रिड ने स्पेनिश फुटबॉल लीग ला लिगा की वापसी पर रविवार को यहां इबार को 3-1 से हराकर शीर्ष पर चल रहे बार्सिलोना के साथ खिताब की अपनी दावेदारी बनाए रखी। इस मैच के दौरान मार्सेलो ने गोल करने के बाद घुटना टेककर ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ अभियान का समर्थन भी किया। ब्राजीली डिफेंडर ने रीयाल की तरफ से 37वें मिनट में तीसरा गोल करने के बाद अपना बायां घुटना नीचे टेका और अपनी दायें हाथ की मुट्ठी बंद करके उसे हवा में लहराया। अमेरिका में अफ्रीकी मूल के जार्ज फ्लॉयड की एक श्वेत पुलिसकर्मी के हाथों मौत के बाद यह अभियान विश्व भर में जोर पकड़ रहा है। स्पैनिश लीग में कुछ खिलाड़ियों ने खुलकर इस अभियान का समर्थन किया है। वेलेंसिया के खिलाड़ियों ने भी पिछले सप्ताह अभ्यास सत्र से पहले एक घुटना टेककर अभियान का समर्थन किया था। रीयाल मैड्रिड की जीत में (चौथे) और सर्जिया रामोस (30वें मिनट) ने भी गोल किए। इबार की तरफ से एकमात्र गोल 60वें मिनट में पेड्रो बिगास ने किया। यह मैच क्लब के ट्रेनिंग सेंटर में खेला गया क्योंकि 80 हजार दर्शकों की क्षमता वाले सेंटियागो बर्नाबेउ स्टेडियम में नवीनीकरण का काम चल रहा है। कोरोना वायरस महामारी के कारण इस छह हजार क्षमता वाले स्टेडियम में भी कोई दर्शक नहीं था। इस स्टेडियम का उपयोग मुख्य रूप से मैड्रिड की ‘बी’ टीम करती है। रीयाल के कोच जिनेदिन जिदान का यह टीम के साथ यह 200वां मैच भी था। उन्होंने बाद में कहा, ‘यह पूरी तरह से अलग तरह का अनुभव था। आपको इसे अपनाना होगा।’ जिदान के कोच रहते हुए रीयाल की यह 90वीं जीत है और वह मिगुएल मुनोज (257 जीत) के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। इस जीत से रीयाल मैड्रिड अब बार्सिलोना से दो अंक पीछे रह गया है। बार्सिलोना ने शनिवार को मालोर्का पर 4-0 की शानदार जीत से वापसी की थी। इबार और मालोर्का दोनों पर दूसरी डिवीजन में खिसकने का खतरा मंडरा रहा है। लीग के एक अन्य मैच में एटलेटिको मैड्रिड का संघर्ष जारी रहा। एथलेटिक बिलबाओ ने उसे 1-1 से बराबरी पर रोका। एटेलेटिको का यह लगातार तीसरा ड्रॉ है। इससे उसकी टीम छठे स्थान पर पहुंच गई और इस तरह से वह अभी चैंपियन्स लीग में जगह बनाने की दौड़ से बाहर है। एथलेटिक की टीम दसवें स्थान पर है।

कोरोना: एश्ले बार्टी भी यूएस ओपन के खिलाफ June 14, 2020 at 09:47PM

ब्रिस्बेनविश्व की नंबर एक महिला खिलाड़ी एश्ले बार्टी भी उन खिलाड़ियों में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने कोरोना वायरस को लेकर अनिश्चितता के बावजूद यूएस ओपन टेनिस टूर्नमेंट के आयोजन पर चिंता जताई है। बार्टी को अभी फ्रेंच ओपन के खिताब का बचाव करने का मौका नहीं मिला क्योंकि सभी टेनिस प्रतियोगिताएं ठप्प पड़ी हैं। वह जानती हैं कि 2020 में विंबलडन नहीं होगा लेकिन वह पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 31 अगस्त से शुरू होने वाले यूएस ओपन को लेकर स्पष्ट फैसले का इंतजार कर रही हैं। नोवाक जोकोविच और राफेल नडाल भी यूएस ओपन के लिये खिलाड़ियों पर संभावित प्रतिबंधों और अन्य बदलावों को लेकर आशंकाएं जता चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार विश्व की नंबर दो महिला खिलाड़ी सिमोना हालेप का खेलना भी संदिग्ध है। बार्टी ने कहा, ‘मैं भी चिंतित हूं। मैं जानती हूं कि आयोजक टूर्नमेंट के आयोजन के इच्छुक हैं लेकिन हर किसी को सुरक्षित रखना प्राथमिकता होनी चाहिए।’ न्यूयॉर्क में अगस्त में इस ग्रैंड स्लैम टूर्नमेंट के आयोजन पर अमेरिकी टेनिस संघ इस सप्ताह फैसला कर सकता है।

सिर्फ 7 मिनट में बना था भारत का कोच: कर्स्टन June 14, 2020 at 08:39PM

नई दिल्लीकोचिंग में उनकी दिलचस्पी नहीं थी और उन्होंने भारतीय टीम के कोच पद के लिए आवेदन भी नहीं किया था लेकिन को 2007 में केवल सात मिनट में यह महत्वपूर्ण पद मिल गया था जिसमें महान सुनील गावसकर की भूमिका भी अहम रही थी। कर्स्टन ने ‘क्रिकेट कलेक्टिव’ पॉडकास्ट में 2007 में घटी उन घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह सुनील गावसकर के निमंत्रण पर साक्षात्कार के लिए गए थे जो कि तब कोच चयन पैनल का हिस्सा थे। कर्स्टन के सामने उनके पूर्ववर्ती का अनुबंध रखा गया था और आखिर में उन्हें यह पद मिल गया। कर्स्टन ने कहा, ‘मुझे सुनील गावसकर का ईमेल मिला था कि क्या मैं भारतीय टीम का कोच बनना चाहूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे लगा कि यह मजाक है। मैंने इसका जवाब भी नहीं दिया। उन्होंने मुझे एक और मेल भेजा जिसमें कहा था, ‘क्या आप साक्षात्कार के लिए आना चाहोगे। मैं उसे अपनी पत्नी को दिखाया और उसने कहा कि उनके पास कोई गलत व्यक्ति है।’ कर्स्टन ने कहा, ‘इस तरह से अजीबोगरीब ढंग से मेरा इस क्षेत्र में प्रवेश हुआ जो सही भी था। मेरे कहने का मतलब है कि मुझे कोचिंग का किसी तरह का अनुभव नहीं था।’ पढ़ें- कर्स्टन ने कहा कि जब वह साक्षात्कार के लिए भारत पहुंचे तो उन्हें तत्कालीन कप्तान अनिल कुंबले से मिलने का मौका मिला और दोनों मेरी दावेदारी की संभावना पर हंस पड़े थे। उन्होंने कहा, ‘मैं साक्षत्कार के लिए पहुंचा तो कई अजीबोगरीब अनुभव हुए। जब मैं साक्षात्कार के लिए आया तो मैंने अनिल कुंबले को देखा जो तब भारतीय कप्तान था और उन्होंने कहा, ‘तुम यहां क्या कर रहे हो।’ मैंने कहा कि मैं आपका कोच बनने के लिए साक्षात्कार देने आया हूं।’ कर्स्टन ने कहा, ‘हम इस पर हंस पड़े थे। यह हंसने वाली बात भी थी।’ कोचिंग का अनुभव नहीं थाउन्हें तब कोचिंग का कोई अनुभव भी नहीं था लेकिन कर्स्टन भारत के सबसे सफल कोचों में शामिल हो गए। उनके रहते हुए टीम ने 2009 में टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया और दो साल बाद विश्व कप जीता। साक्षात्कार के बारे में कर्स्टन ने कहा कि वह बिना तैयारी के साक्षात्कार के लिए गए थे और उस समय चयन पैनल में शामिल वर्तमान भारतीय कोच रवि शास्त्री ने माहौल हल्का किया था। दक्षिण अफ्रीका के इस पूर्व सलामी बल्लेबाज ने कहा कि उन्हें कोच पद हासिल करने में केवल सात मिनट का समय लगा था। पढ़ें- रवि शास्त्री ने किए थे ये सवालकर्स्टन ने कहा, ‘मैं बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट बोर्ड) अधिकारियों के सामने था और माहौल काफी गंभीर था। बोर्ड के सचिव ने कहा, ‘मिस्टर कर्स्टन क्या आप भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर अपना दृष्टिकोण पेश करोगे।’ मैंने कहा, ‘मेरे पास कुछ भी नहीं है। किसी ने भी मुझसे इस तरह की तैयारी करने के लिए नहीं कहा था। मैं अभी यहां पहुंचा हूं।’ उन्होंने कहा, ‘समिति में शामिल रवि शास्त्री ने मुझसे कहा, ‘गैरी हमें यह बताओ कि दक्षिण अफ्रीकी टीम के रूप में भारतीयों को हराने के लिए आप क्या करते थे।’ 7 मिनट में बन गए थे टीम इंडिया के कोचउन्होंने कहा- मुझे लगा कि माहौल हल्का करने के लिए यह बहुत अच्छा था क्योंकि मैं इसका उत्तर दे सकता था और मैंने दो तीन मिनट में उसका जवाब दिया भी पर मैंने ऐसी किसी रणनीति का जिक्र नहीं किया जो हम उस दिन उपयोग कर सकते थे। कर्स्टन ने कहा, ‘वह और बोर्ड के अन्य सदस्य काफी प्रभावित थे क्योंकि इसके तीन मिनट बाद बोर्ड के सचिव ने मेरे पास अनुबंध पत्र खिसका दिया था। मेरा साक्षात्कार केवल सात मिनट तक चला था।’ उन्होंने कहा कि उन्हें जो अनुबंध दिया गया था उस पर निर्वतमान कोच ग्रेग चैपल का नाम लिखा था। चैपल का नाम काटकर मेरा नाम लिख दियाकर्स्टन ने कहा, ‘मैंने अनुबंध हाथ में लिया और पहला पेज देखा तो अपना नाम ढूंढने लगा। मैंने अपना नाम नहीं देखा लेकिन मुझे ग्रेग चैपल का नाम दिखा जो पूर्व कोच थे।’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए मैंने उसे वापस खिसकाकर कर कहा, ‘सर, आपने मुझे अपने पिछले कोच का अनुबंध सौंपा है। उन्होंने अपनी जेब से पेन निकाला और उनका (चैपल) नाम काटकर उस पर मेरा नाम लिख दिया था।’

घरेलू क्रिकेट खेलना चाहते हैं कनेरिया, PCB से बैन हटाने को कहा June 14, 2020 at 07:15PM

कराचीपूर्व पाकिस्तानी लेग स्पिनर दानेश कनेरिया ने अपने क्रिकेट बोर्ड से उन पर 2013 में स्पॉट फिक्सिंग के लिए लगाया गया आजीवन प्रतिबंध हटाने की अपील की है। पाकिस्तान की तरफ से 61 टेस्ट मैचों में 261 विकेट लेने वाले कनेरिया क्रिकेट में वापसी के लिए बेताब है और यहां तक कि वह घरेलू क्रिकेट में खेलने के लिए भी उत्सुक हैं। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष एहसान मनि को भेजे गए पत्र में 39 वर्षीय कनेरिया के कानूनी फर्म ने बैन हटाने की गुजारिश की जिससे यह क्रिकेटर खेल के जरिए अपनी आजीविका चला सकें। कनेरिया पर इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने आजीवन प्रतिबंध लगाया था। जब इसके खिलाफ उनकी अपील खारिज हो गई तो पीसीबी ने भी उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। कनेरिया पूर्व में भी कई बार कह चुके हैं कि अगर मोहम्मद आमिर और सलमान बट जैसे खिलाड़ियों पर से प्रतिबंध हटाया जा सकता है तो फिर उन्हें अपनी आजीविका चलाने से वंचित करना अनुचित होगा। इस लेग स्पिनर को 2009 में इंग्लिश काउंटी एसेक्स की तरफ से डरहम के खिलाफ खेले गए मैच में मर्विन वेस्टफील्ड के साथ स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया गया था। वह लंबे समय से पीसीबी से मदद की गुहार लगा रहे हैं। कनेरिया पाकिस्तान की तरफ से खेलने वाले केवल दूसरे हिंदू खिलाड़ी हैं। उनसे पहले उनके मामा अनिल दलपत ने भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था।