Friday, March 20, 2020

83 साल की उम्र में पीके बनर्जी का निधन, फीफा ने 20वीं शताब्दी में भारत का सबसे महान फुटबॉल खिलाड़ी घोषित किया था March 19, 2020 at 11:21PM

खेल डेस्क. 1962 के एशियन गेम्स में भारत को फुटबॉल का गोल्ड दिलाने वाले पीके. बनर्जी की शुक्रवार को 83 साल की उम्र में कोलकाता केमेडिका सुपरस्पेशिलिटी अस्पतालमें मौत हो गई। वे 2 मार्च से निमोनिया के कारण अस्पताल में भर्ती थे। उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था। इसके बाद से ही उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था थे। लेकिन शुक्रवार दोपहर करीब 12.30 बजे उन्होंने अंतिमसांस ली।उन्हें पार्किंसन, दिल की बीमारी और डिम्नेशिया भी था।उनके छोटे भाई प्रसून बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के सांसद हैं।

बनर्जी ने भारत के लिए 84 मैच में 65 गोल किए थे। उन्होंने 1960 के रोम ओलिंपिक में भारत की कप्तानी की थी और फ्रांस के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ रहे मैच में भारत की तरफ से बराबरी का गोल दागा था। वे 1956 के मेलबर्न ओलिंपिक खेलने वाली भारतीय टीम के भी सदस्य थे। तब भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया को 4-1 से हराया था और वह चौथे स्थान पर रही थी।

फीफा ने बनर्जी को 2004 में ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया था

अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संघ ने उन्हें 20वीं शताब्दी में भारत का सबसे महान फुटबॉलर घोषित किया था। 2004 में फीफा ने इसके लिए उन्हें ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया था।



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PK Banerjee died at the age of 83, FIFA declared him India's greatest footballer in 20th century

ओलिंपिक स्थागित के पक्ष में समिति का अधिकारी March 19, 2020 at 11:00PM

तोक्यो समिति के एक अधिकारी ने कोरोनावायरस से व्याप्त स्थिति के कारण ओलिंपिक खेलों को स्थगित करने की बात कही है। रिटायर्ड जूडो खिलाड़ी काओरी यामागुची जो जेओसी कार्यकारी बोर्ड के सदस्य हैं ने जापान के अखबार निक्केई से कहा कि खिलाड़ी 24 जुलाई से होने वाले खेलों की तैयारी करने की स्थिति में नहीं है। यामागुची ने कहा, ‘ओलिंपिक उस स्थिति में नहीं होने चाहिए जहां विश्व इसका लुत्फ नहीं उठा सके।’ उन्होंने कहा, ‘जहां तक मैं कह सकती हूं, अमेरिका और यूरोप के खिलाड़ी ट्रेनिंग और अपने क्वालीफाइंग मैचों को खत्म नहीं कर पा रहे हैं। इससे उनका ओलिंपिक की तैयारी करना मुश्किल हो रहा है।’ 55 साल की यामागुची ने कहा कि वह 27 मार्च को होने वाली जेओसी की बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे को उठाने वाली हैं। यामागुची की टिप्पणी उस समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) के अध्यक्ष थॉमस बाख ने खिलाड़ियों से अपनी तैयारियों को जारी रखने को कहा है। इससे पहले विश्व एथलेटिक्स के अध्यक्ष सेबास्टियन कोए ने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी को ओलिंपिक खेलों को स्थगित किया जा सकता है। मशाल का जापान में फीका स्वागतओलिंपिक मशाल शुक्रवार को जापान पहुंच गई, जिसका सादे समारोह में स्वागत किया गया। विशेष लालटेन से ढकी मशाल चार्टर्ड उड़ान से यहां पहुंची। इसके स्वागत के लिए 200 स्कूली बच्चों को बुलाने का कार्यक्रम आयोजकों को रद्द करना पड़ा। पूर्व ओलिंपिक जूडो चैंपियन साओरी योशिदा और तदाहिरो नोमूरा ने पारंपरिक कुंड में कुछ अधिकारियों या मेहमानों के सामने मशाल प्रज्जवलित की। तोक्यो 2020 के प्रमुख योशिरो मोरी ने कहा, ‘बच्चे इस मशाल का स्वागत करने आने वाले थे लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर वह कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।’ मशाल रिले 26 मार्च से शुरू होगी।आयोजकों ने रिले के रास्ते में दर्शकों से भीड़ नहीं बनाने के लिए कहा है।

जब सिंधु ने कोरोना के बावजूद खेला ऑल इंग्लैंड March 19, 2020 at 10:26PM

नई दिल्लीभारत सरकार की यात्रा संबंधी पाबंदियों के बाद को ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप से हटने का विकल्प दिया गया था लेकिन ओलिंपिक रजत पदक विजेता ने कोविड 19 के बावजूद खेलने का फैसला किया। सरकार ने 11 मार्च को यात्रा संबंधी संशोधित परामर्श जारी किया था जिसके तहत अप्रैल तक सारे वीजा रद्द कर दिए गए थे। इसके साथ ही सभी भारतीयों को प्रभावित देशों से स्वदेश लौटने के लिए कहा गया था। इंग्लैंड कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में से है। सिंधु के पिता पी वी रमन्ना ने कहा, ‘11 मार्च की रात को जब परामर्श जारी किया गया, अगले दिन सुबह गोपी (पुलेला गोपीचंद) ने हमसे कहा कि मैच नहीं खेलते हैं और वापिस जाते हैं। क्या ख्याल है।’ उन्होंने कहा, ‘सिर्फ सिंधु, लक्ष्य सेन, सिक्की रेड्डी और अश्विनी पोनप्पा दूसरे दौर में थे। हमने खेलने का फैसला किया। विमल ने भी कहा कि खेलते हैं। चूंकि हम पहले से वहां थे और एक दिन और रूकने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था।’ पढ़ें- साइना नेहवाल, पारुपल्ली कश्यप और बी साइ प्रणीत पहले दौर से बाहर हो चुके थे। लक्ष्य दूसरे दौर में हार गया जबकि सिंधु क्वार्टर फाइनल में हारी। रमन्ना ने कहा, ‘इंग्लैंड में कोई मास्क नहीं पहन रहा था लेकिन हमने पहने। हमने सारी एहतियात बरती और खाने के समय ही मास्क उतारते थे। हमने लगातार तुलसी के पत्तों का गर्म पानी पीया।’ उन्होंने कहा, ‘सिंधु और मैने लौटने के बाद खुद को अलग कर लिया है। हम किसी से मिल नहीं रहे हैं। मेरी बड़ी बेटी घर के पास रहती है लेकिन हम उससे भी नहीं मिल रहे। सिंधु छत पर ही कसरत करती है और घर के पास जागिंग कर लेती है।’

महान फुटबॉलर पीके बनर्जी का 83 वर्ष की उम्र में निधन March 19, 2020 at 10:37PM

कोलकाताभारत के महान फुटबॉलर का शुक्रवार को यहां लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे। बनर्जी के परिवार में उनकी बेटी पाउला और पूर्णा हैं जो नामचीन शिक्षाविद् हैं। उनके छोटा भाई प्रसून बनर्जी तृणमूल कांग्रेस से सांसद हैं। एशियाई खेल 1962 के स्वर्ण पदक विजेता बनर्जी भारतीय फुटबॉल के स्वर्णिम दौर के साक्षी रहे हैं। वह पिछले कुछ समय से निमोनिया के कारण श्वास की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें पार्किंसन, दिल की बीमारी और डिम्नेशिया भी था। वह दो मार्च से अस्पताल में लाइफ सपोर्ट पर थे। उन्होंने रात 12 बजकर 40 मिनट पर आखिरी सांस ली। 23 जून 1936 को जलपाईगुड़ी के बाहरी इलाके स्थित मोयनागुड़ी में जन्मे बनर्जी बंटवारे के बाद जमशेदपुर आ गए। उन्होंने भारत के लिए 84 मैच खेलकर 65 गोल किए। जकार्ता एशियाई खेल 1962 में स्वर्ण पदक जीतने वाले बनर्जी ने 1960 रोम ओलिंपिक में भारत की कप्तानी की और फ्रांस के खिलाफ एक एक से ड्रॉ रहे मैच में बराबरी का गोल किया। इससे पहले वह 1956 की मेलबर्न ओलिंपिक टीम में भी थे और क्वॉर्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया पर 4-2 से मिली जीत में अ हम भूमिका निभाई। फीफा ने उन्हें 2004 में शताब्दी ऑर्डर ऑफ मेरिट प्रदान किया था।